Earthing -Defination ,Procedure,types

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अर्थिंग ITI Electrician ट्रेड का एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है और National Council for Vocational Training की ऑनलाइन परीक्षा में इससे जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। यह विषय न केवल थ्योरी बल्कि प्रैक्टिकल दृष्टि से भी बेहद जरूरी है।

Earthing शब्द का अर्थ है विद्युत उपकरण को नगण्य प्रतिरोध के लीड द्वारा पृथ्वी  से जोड़ना।

मानव जीवन, घरों और मशीनों की सुरक्षा के लिए अर्थिंग का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। यह विद्युत उपकरण की बाडी मे बहने वाली धारा को शून्य  पर लाता है और इस प्रकार, ऑपरेटर को झटका से बचाता है।

अर्थ फॉल्ट की स्थिति में, सर्किट के माध्यम से भारी करंट प्रवाहित होता है, सर्किट का फ्यूज पिघल जाता है या सर्किट का MCB नीचे गिर जाता है और दोषपूर्ण सर्किट आपूर्ति से डिस्कनेक्ट हो जाता है।

अर्थिंग के प्रकार (Types of Earthing)

विद्युत उपकरणों को पृथ्वी से जोड़कर अर्थिंग (Earthing) प्राप्त की जाती है, इसके लिए एक अच्छा कंडक्टर का उपयोग किया जाता है जिसे अर्थ इलेक्ट्रोड कहा जाता है। यह उपकरण से पृथ्वी तक बहुत कम प्रतिरोध वाला मार्ग सुनिश्चित करता है।

अर्थिंग (Earthing) के 3 महत्वपूर्ण तरीके हैं

1. प्लेट अर्थिंग (Plate Earthing)

Plate Earthing की यह विधि नमी वाले स्थानों के लिए अधिक उपयुक्त है। इसमें लगभग 90 सेमी × 90 सेमी आकार का गड्‌ढा भूतल से 1.5 से 3 मी गहराई तक (नमो प्राप्त होने तक) खोदा जाता है। इस गड्‌ढे में अर्थिग (Earthing) प्लेट को ऊर्ध्व स्थिति में स्थापित कर उसे अर्थिग तार से नट-बोल्ट के द्वारा जोड़ दिया जाता है। अर्थिग प्लेट के चारों ओर नमक एवं चारकोल की एकान्तर परतें 15 सेमी मोटाई तक लगाई जाती हैं।

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गद्दडे में जल डालने के लिए एक पाइप लगाकर उसे मिट्टी से भर दिया जाता है। गड्‌ढे के ऊपरी सिरे पर जल पाइप को एक फनल से जोड़ दिया जाता है और उसके चारों ओर लगभग 30 सेमी 30 सेमी सीमेन्ट बॉक्स बनाकर, कास्ट आयरन के ढक्कन से ढक दिया जाता है और ‘अर्थ’ उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।

आवश्यक सामग्री

प्लेट अर्थिग के निर्माण में निम्न सामग्री प्रयोग की जाती हैं

  1. अर्थिंग प्लेट – 60 सेमी × 60 सेमी आकार की होती है। ताँबे के लिए 3.15 मिमी तथा जी.आई. के लिए 6.30 मिमी मोटाई रखी जाती है।
  2. अर्थिंग तार – 8 SWG जी.आई. तार का उपयोग किया जाता है।
  3. जी.आई. पाइप (12.7 मिमी) – इसी पाइप के अंदर से अर्थिंग तार गुजारा जाता है।
  4. जी.आई. पाइप (19 मिमी) – लगभग 1.2 मीटर लंबा होता है, जिसका उपयोग पानी डालकर नमी बनाए रखने के लिए किया जाता है।
  5. फनल (Funnel) – जालीदार फिल्टर सहित लगाया जाता है, और इसका ऊपरी सिरा जमीन से 5–10 सेमी ऊपर रखा जाता है।
  6. कास्ट आयरन ढक्कन – 30 सेमी × 30 सेमी आकार का होता है, जो पाइप को ढकने के लिए उपयोग किया जाता है।
  7. नमक व चारकोल – इसमें डलेदार नमक तथा कच्चे कोयले (चारकोल) का चूर्ण प्रयोग किया जाता है, जिससे अर्थिंग की चालकता और नमी बनी रहती है।
  8. नट-बोल्ट – लगभग 50 मिमी लंबाई के; ताँबे की प्लेट के साथ ताँबे के और जी.आई. प्लेट के साथ जी.आई. के उपयोग किए जाते हैं।

Plate Earthing के फायदे

✔ सरल और सस्ती विधि
✔ अच्छी conductivity
✔ घरेलू और छोटे उद्योगों के लिए उपयुक्त

Plate Earthing के नुकसान

❌ समय के साथ resistance बढ़ सकता है
❌ नियमित पानी डालना (maintenance) जरूरी
❌ सूखी जमीन में कम प्रभावी

उपयोग (Applications)

  • घरों में wiring system
  • छोटे उद्योग (Small Industries)
  • Distribution system

2. Pipe Earthing

   अर्थिग ( Earthing) की यह विधि सभी प्रकार के स्थानों पर प्रयोग की जा सकती है। इसमें लगभग 30 सेमी x 30 सेमी आकार का गड्‌ढ़ा, भूतल से 2.5 से 4.0 मी गहराई तक खोदा जाता है। इस गड्‌ढे में अर्थिग तार लपेटकर जी.आई. वाशर तथा सर्किट से कस दिया जाता है।

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अर्थिग पाइप के चारों ओर 15 सेमी चौड़ाई में नमक के डले तथा चारकोल चूर्ण की परतें जमा दी जाती हैं।

गड्‌ढे में जल डालने के लिए पाइप तथा जनल लगाकर गड्ढे को मिटटी आकार का सीमेन्ट-कंक्रीट बॉक्स बनाकर कास्ट आयरन के ढक्कन ढक दिया जाता है। इस प्रकार निर्मित ‘अर्थ’ उपयोग के लिए तैयार जाता है। से हो

आवश्यक सामग्री Essential Materials -

  1.   जी.आई. पाइप ( GI pipe) – इस पाइप का व्यास 38 मिमी तथा इसकी लम्बाई 2.5 मी होनी चाहिए, जिसमें 12 मिमी व्यास के अनेक छिद्र बने होने चाहिए।

  2. अर्थिग तार (Earthing wire) – इस विधि में 8 SWG जी.आई. तार का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  3. अर्थिग जी.आई. पाइप (Earthing GI pipe) – इसका व्यास 12.7 मिमी होना चाहिए। अर्थिग तार, इसी पाइप में स्थापित किया जाता है।

  4. जी.आई. पाइप ( Gl pipe) – इसका व्यास 19 मिमी तथा लम्बाई 95 सेमी होनी चाहिए। इसका उपयोग ‘अर्थ’ में नमी बनाए रखने हेतु जल डालने के लिए किया जाता है।
  5. फनल (Funnel) – तार की जाली से बने फिल्टर सहित फिल्टर उपयोग किया जाता। स्थापना के समय फनल का ऊपरी सिरा, भूतल से 5 से 10 सेमी उभरा हुआ रखना चाहिए।
  6. कास्ट आयरन ढक्कन (Cast iron cover) –  इसका आकार 30 सेमी×30 सेमी होना चाहिए।

  7. नमक व चारकोल (Salt and charcoal) –  डलेदार नमक तथा चारकोल चूर्ण होना चाहिए।

  8. जी.आई. वाशर तथा सॉकेट (GI washer and socket) – इसके जी.आई. वाशर तथा सकिट का आन्तरिक व्यास 12.7 मिमी होना चाहिए।

Pipe Earthing के फायदे

✔ Plate Earthing से सस्ती
✔ Installation आसान
✔ कम जगह में संभव
✔ अच्छी earthing (especially moist soil में)

Pipe Earthing के नुकसान

❌ सूखी या रेतीली जमीन में कम प्रभावी
❌ समय-समय पर पानी डालना पड़ता है
❌ पाइप में corrosion हो सकता है

उपयोग (Applications)

  • Residential Buildings
  • Commercial Buildings
  • Small Industries
  • Electrical Installations 

3. Chemical Earthing

इस विधि में एक GI या Copper Electrode (इलेक्ट्रोड) को जमीन में गहराई तक स्थापित किया जाता है और उसके चारों ओर विशेष Backfill Compound (Chemical Powder) भरा जाता है, जो नमी को बनाए रखता है और लगातार कम अर्थ रेजिस्टेंस देता है।

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मुख्य भाग (Components)

  1. Electrode (GI / Copper Rod)
  2. Backfill Compound (Chemical Material)
  3. Inspection Chamber (निरीक्षण कक्ष)
  4. Earthing Strip / Wire
  5. Watering Arrangement (कुछ मामलों में)

कार्य सिद्धांत (Working Principle)

  • Chemical compound नमी को लंबे समय तक बनाए रखता है
  • यह जमीन के resistivity को कम करता है
  • इससे अर्थिंग सिस्टम का resistance हमेशा कम और स्थिर रहता है

Chemical Earthing के फायदे

✔ कम Earth Resistance (1 ओम से भी कम संभव)
✔ Maintenance की जरूरत बहुत कम
✔ सूखी या रेतीली जमीन में भी प्रभावी
✔ लंबी उम्र (15–25 साल तक)
✔ बिजली के झटकों से बेहतर सुरक्षा

Chemical Earthing के नुकसान

❌ शुरुआती लागत ज्यादा होती है
❌ सही installation न हो तो performance कम हो सकती है

उपयोग (Applications)

  • Industrial Plants
  • Power Substations
  • Telecom Towers
  • Data Centers
  • Residential Buildings 

सबसे अधिक उपयोग होने वाले Earthing Chemical

Bentonite – नमी बनाए रखता है, swelling property होती है
Marconite – High conductivity, permanent solution
Graphite – अच्छा electrical conductor

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Backfill Compound के कार्य

  • जमीन की resistivity कम करना
  • नमी को लंबे समय तक बनाए रखना
  • इलेक्ट्रोड और मिट्टी के बीच अच्छा संपर्क बनाना

अर्थिंग (Earthing) का NCVT Online परीक्षा में महत्व

NCVT ऑनलाइन परीक्षा में सफलता के लिए अर्थिंग का अध्ययन बहुत जरूरी है, क्योंकि यह सुरक्षा, कार्यक्षमता और तकनीकी ज्ञान तीनों से जुड़ा महत्वपूर्ण टॉपिक है।

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FAQs

Plate Earthing क्या है?

प्लेट अर्थिंग एक विधि है जिसमें एक धातु की प्लेट (जैसे तांबा या जस्ती लोहा) को पृथ्वी में दफन करके विद्युत उपकरणों को पृथ्वी से जोड़ा जाता है, ताकि किसी भी दोषपूर्ण करंट को सुरक्षित रूप से पृथ्वी में बहाया जा सके।

प्लेट अर्थिंग सुनिश्चित करता है कि किसी भी प्रकार के फॉल्ट करंट या अनचाहे वोल्टेज को पृथ्वी में सही तरीके से निस्तारित किया जाए, जिससे विद्युत उपकरणों को नुकसान से बचाया जा सके और उपयोगकर्ताओं को बिजली के झटके से सुरक्षा मिल सके। यह विद्युत सुरक्षा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्लेट अर्थिंग के प्रमुख घटक हैं:

  • अर्थिंग प्लेट: यह एक धातु की प्लेट होती है (जैसे तांबा या जस्ती लोहा)।
  • अर्थिंग इलेक्ट्रोड: यह प्लेट को विद्युत प्रणाली से जोड़ता है।
  • अर्थिंग कंडक्टर: यह कंडक्टर सिस्टम को अर्थिंग प्लेट से जोड़ता है।
  • अर्थ पिट: यह वह गड्ढा है जिसमें प्लेट दफनाई जाती है ताकि यह मिट्टी के संपर्क में आए।

तांबा और जस्ती लोहा (GI) प्लेट के लिए सामान्यत: उपयोग किए जाते हैं क्योंकि इनकी चालकता बहुत अच्छी होती है और ये जंग से भी सुरक्षित रहते हैं। तांबा अधिक प्रभावी होता है लेकिन महंगा होता है, जबकि जस्ती लोहा सस्ता होता है, लेकिन समय के साथ जंग लग सकता है।

प्लेट को सामान्यतः 1 से 3 मीटर की गहराई तक दफनाया जाता है, यह मिट्टी की स्थिति पर निर्भर करता है। गहरी गहराई तक दफनाने से सुनिश्चित होता है कि प्लेट को पर्याप्त संपर्क मिलता है ताकि करंट सही तरीके से पृथ्वी में बह सके।

प्लेट को सामान्यतः 1 से 3 मीटर की गहराई तक दफनाया जाता है, यह मिट्टी की स्थिति पर निर्भर करता है। गहरी गहराई तक दफनाने से सुनिश्चित होता है कि प्लेट को पर्याप्त संपर्क मिलता है ताकि करंट सही तरीके से पृथ्वी में बह सके।

प्लेट को सामान्यतः 1 से 3 मीटर की गहराई तक दफनाया जाता है, यह मिट्टी की स्थिति पर निर्भर करता है। गहरी गहराई तक दफनाने से सुनिश्चित होता है कि प्लेट को पर्याप्त संपर्क मिलता है ताकि करंट सही तरीके से पृथ्वी में बह सके।

प्लेट का आकार विद्युत लोड और क्षेत्र की मिट्टी की प्रतिरोधकता पर निर्भर करता है। सामान्यत: प्लेट का आकार 0.5m² से 1m² तक हो सकता है और इसकी मोटाई 6mm से 12mm के बीच होती है।

प्लेट अर्थिंग प्रणाली की नियमित देखभाल और निरीक्षण करना आवश्यक है। इसे हर 3 से 5 साल में एक बार जांचना चाहिए। देखभाल में कनेक्शन की स्थिति, जंग का निरीक्षण और प्लेट की गहराई और स्थिति की जांच शामिल होती है।

प्लेट अर्थिंग की लागत उपयोग किए गए पदार्थ (जैसे तांबा या GI), पृथ्वी गड्ढे की गहराई और श्रम शुल्क पर निर्भर करती है। तांबा प्लेटें जस्ती लोहा की तुलना में महंगी होती हैं, लेकिन इनकी चालकता बेहतर होती है और ये ज्यादा समय तक टिकती हैं।

प्लेट अर्थिंग नम और अच्छे चालकता वाली मिट्टी में सबसे अच्छा काम करती है। अगर मिट्टी सूखी या चट्टानी है, तो अतिरिक्त उपाय जैसे रासायनिक अर्थिंग या अधिक चालकता वाली सामग्री का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है।

हां, प्लेट अर्थिंग एक सुरक्षित और विश्वसनीय विधि है, यदि इसे सही तरीके से स्थापित किया जाए। सही ढंग से स्थापित होने पर यह विद्युत झटके और विद्युत उपकरणों के नुकसान से सुरक्षा प्रदान करती है।

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