ITI Electrician: Magnet Formation Methods – Complete Exam Notes

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Magnet formation methods ITI Electrician परीक्षा का महत्वपूर्ण विषय है। चुम्बक एक स्पर्श, दोहरी स्पर्श, विभाजित स्पर्श, वैद्युतिक तथा प्रेरण विधि से बनाए जाते हैं। वैद्युतिक विधि से शक्तिशाली चुम्बक बनता है। यह टॉपिक NCVT ऑनलाइन परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।

चुम्बक निर्माण की विधियाँ (Magnet Formation Methods)

चुम्बकीय पदार्थों (जैसे स्टील या लोहा) से कृत्रिम चुम्बक बनाने की मुख्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:

1. एकल स्पर्श विधि (Single Touch Method)

यह सबसे सरल विधि है। इसमें एक स्टील की छड़ को रखकर एक छड़-चुम्बक के किसी एक ध्रुव (माना उत्तरी ध्रुव N) को छड़ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक बार-बार रगड़ा जाता है। रगड़ते समय चुम्बक को वापस लाते हुए उठाया जाता है। 

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  • प्रक्रिया: चुम्बक को बिना उठाए 50-60 बार एक ही दिशा में रगड़ें।
  • ध्रुवता (Polarity): जिस सिरे से रगड़ना शुरू किया जाता है, वहां वही ध्रुव बनता है जिससे रगड़ा जा रहा था (जैसे N), और दूसरा सिरा विपरीत ध्रुव (S) बन जाता है।
  •  यह सरल विधि है, परन्तु बना चुम्बक कमजोर होता है।

2. दोहरी स्पर्श विधि (Double Touch Method)

इसमें दो छड़-चुम्बकों का एक साथ उपयोग किया जाता है।

  • प्रक्रिया: स्टील की छड़ के मध्य बिंदु पर दो अलग-अलग चुम्बकों के विपरीत ध्रुवों को रखा जाता है। बीच में लकड़ी का एक छोटा गुटका रखा जाता है ताकि चुम्बक आपस में न मिलें। 
  • अब दोनों चुम्बकों को बिना उठाए मध्य से सिरों की ओर रगड़ा जाता है। इससे स्टील की छड़ में स्थायी चुम्बकत्व उत्पन्न हो जाता है।
  • विशेषता: यह एकल स्पर्श विधि से अधिक प्रभावी है।

3. विभाजित स्पर्श विधि (Divided Touch Method)

यह दोहरी स्पर्श विधि के समान ही है, लेकिन इसमें बीच में लकड़ी का गुटका नहीं होता।

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  • प्रक्रिया: दो चुम्बकों के विपरीत ध्रुवों को स्टील की छड़ के मध्य से शुरू करके सिरों तक रगड़ा जाता है, 
  • हर बार चुम्बकों को उठाकर पुनः मध्य में रखा जाता है और प्रक्रिया 50–60 बार दोहराई जाती है।
  •  इस विधि से अच्छी गुणवत्ता का चुम्बक बनता है।

4. वैद्युतिक विधि (Electric Method)

स्थायी और शक्तिशाली चुम्बक बनाने के लिए यह सबसे बेहतरीन विधि है।

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  • प्रक्रिया: एक इंसुलेटेड तांबे के तार की क्वॉयल (Coil) के बीच स्टील की छड़ को रखा जाता है। इसमें D.C. (Direct Current) प्रवाहित किया जाता है।
  • यदि स्टील की जगह नर्म लोहे (Soft Iron) का प्रयोग करें, तो वह केवल तब तक चुम्बक रहेगा जब तक बिजली चालू है। इसे विद्युत-चुम्बक (Electromagnet) कहते हैं।

5. प्रेरण विधि (Induction Method)

इस विधि में भौतिक संपर्क (रगड़ने) की आवश्यकता नहीं होती।

  • प्रक्रिया: इस विधि में स्टील की छड़ को सीधे क्वॉयल में रखने की आवश्यकता नहीं होती। एक अधिक लपेट वाली क्वॉयल में नर्म लोहे की छड़ रखी जाती है, जिसका एक सिरा बाहर निकला रहता है। उस बाहर निकले भाग पर स्टील की छड़ रख दी जाती है। यह उपकरण पोल-चार्जर (Pole Charger) कहलाता है,  एक शक्तिशाली विद्युत-चुम्बक के पास स्टील की छड़ रखने मात्र से उसमें प्रेरण द्वारा चुंबकीय गुण आ जाते हैं।
  • ध्रुवता (Polarity): प्रेरण द्वारा बनने वाले चुंबक में, प्रेरक चुंबक के पास वाला सिरा विपरीत ध्रुव (Opposite Pole) बनता है। उदाहरण के लिए, यदि आप स्टील की छड़ को मुख्य चुंबक के ‘North’ ध्रुव के पास रखेंगे, तो स्टील का वह सिरा ‘South’ बन जाएगा।
  • शक्ति: यह विधि स्पर्श विधियों (Touch Methods) की तुलना में अधिक तेज और बेहतर है।
  • उपयोग: इसका उपयोग औद्योगिक स्तर पर छोटे और मध्यम आकार के स्थायी चुंबक बनाने के लिए किया जाता है।

प्रेरण विधि से बना चुंबक तब तक शक्तिशाली रहता है जब तक वह मुख्य चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में है। स्टील जैसी कठोर सामग्री में यह प्रभाव स्थायी (Permanent) रह जाता है, जबकि नर्म लोहे में यह प्रभाव धारा बंद होते ही समाप्त हो जाता है।

चुम्बक के गुणधर्म (Properties of Magnet)

चुम्बक वह पदार्थ है जिसमें लौह तथा लौहयुक्त धातुओं को आकर्षित करने का गुण होता है और जिसे धागे से बाँधकर स्वतन्त्र लटकाने पर वह उत्तर–दक्षिण दिशा में स्थिर हो जाता है। प्रत्येक चुम्बक में दो ध्रुव होते हैं — उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव

चुम्बक के मुख्य गुणधर्म निम्नलिखित हैं:

1. आकर्षण एवं प्रतिकर्षण का नियम

  • समान ध्रुव (N–N या S–S) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं
  • असमान ध्रुव (N–S) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं

2. ध्रुवों की समान सामर्थ्य

एक ही चुम्बक के दोनों ध्रुवों की शक्ति (सामर्थ्य) बराबर होती है।

3. बल ध्रुवों की तीव्रता पर निर्भर करता है

चुम्बकीय ध्रुवों के बीच लगने वाला बल, ध्रुवों की तीव्रता के गुणनफल के समानुपाती होता है।

👉 अधिक शक्तिशाली ध्रुव → अधिक बल

4. दूरी का प्रभाव

ध्रुवों के बीच लगने वाला बल, उनके बीच की दूरी के वर्ग के विलोमानुपाती होता है।

👉 दूरी बढ़ेगी → बल घटेगा

5. ध्रुवों पर अधिक शक्ति

  • चुम्बकीय शक्ति सिरों (ध्रुवों) पर सबसे अधिक होती है
  • केन्द्र की ओर जाते-जाते कम होती जाती है
  • मध्य बिंदु पर लगभग शून्य होती है

6. दिशा में स्थिर होना

यदि चुम्बक को धागे से बाँधकर स्वतन्त्र लटकाया जाए:

  • एक सिरा उत्तर दिशा में स्थिर होता है → उत्तरी ध्रुव
  • दूसरा सिरा दक्षिण दिशा में स्थिर होता है → दक्षिणी ध्रुव

7. प्रेरण का गुण

चुम्बक के पास रखने पर चुम्बकीय पदार्थ में भी अस्थायी चुम्बकत्व उत्पन्न हो जाता है।

👉 इसे चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं

8. अचुम्बकत्व (Demagnetization)

  • चुम्बक को लाल गर्म करने से
  • या हथौड़े से पीटने पर
    उसका चुम्बकीय गुण घट जाता है या नष्ट हो सकता है।

9. एकल ध्रुव का अस्तित्व नहीं

चुम्बक को चाहे जितने टुकड़ों में काट दें, हर टुकड़े में दोनों ध्रुव मौजूद रहेंगे।

👉 अकेला उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव अलग से नहीं पाया जा सकता

महत्वपूर्ण बिंदु

  • समान ध्रुव →प्रतिकर्षण
  • असमान ध्रुव → आकर्षण
  • ध्रुवों पर शक्ति → अधिक
  • चुम्बक हमेशा N–S दिशा में रुकता है
  • एकल ध्रुव संभव नहीं

Importance of Magnet Formation Methods – in NCVT Online Exam

Magnet Formation Methods ITI Electrician ट्रेड का महत्वपूर्ण विषय है। NCVT ऑनलाइन परीक्षा में इससे सिद्धांत, MCQ और शॉर्ट नोट प्रश्न पूछे जाते हैं। चुम्बक बनाने की विभिन्न विधियाँ समझने से विद्युत-चुम्बक, मोटर और उपकरणों का कार्य सिद्धांत स्पष्ट होता है। यह टॉपिक बेसिक मैग्नेटिज़्म की नींव मजबूत करता है।

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FAQs

चुम्बक बनाने की मुख्य विधियाँ कितनी हैं?

मुख्यतः पाँच विधियाँ हैं — एक स्पर्श, दोहरी स्पर्श, विभाजित स्पर्श, वैद्युतिक और प्रेरण विधि।

एक स्पर्श विधि सबसे सरल विधि है।

वैद्युतिक विधि से सबसे शक्तिशाली चुम्बक बनता है।

नर्म लोहे को क्वॉयल में धारा प्रवाहित करके बनाया गया अस्थायी चुम्बक विद्युत-चुम्बक कहलाता है।

स्टील से स्थायी चुम्बक बनाया जाता है।

नर्म लोहे से अस्थायी चुम्बक बनता है।

लगभग 50–60 बार रगड़ना चाहिए।

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