ITI Electrician ट्रेड में चुंबकीय महत्वपूर्ण पद जैसे चुम्बकीय फ्लक्स, फ्लक्स घनत्व, चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता, पारगम्यता और संवेदनशीलता का विशेष महत्व है। NCVT Online Exam में इन पदों की परिभाषा, सूत्र और इकाइयों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
चुम्बक का वह गुण, जिससे वह लोहे और लौहयुक्त पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करता है, चुम्बकत्व कहलाता है।
आण्विक सिद्धान्त के अनुसार—
हर चुम्बकीय पदार्थ का प्रत्येक अणु एक छोटे चुम्बक की तरह होता है। हर अणु में दो ध्रुव होते हैं—उत्तरी और दक्षिणी।
चुम्बक को तोड़ने पर भी हर टुकड़े में दोनों ध्रुव होते हैं। कोई ध्रुव अकेला नहीं मिलता।
सामान्य अवस्था में अणु अव्यवस्थित रहते हैं, इसलिए कुल चुम्बकत्व शून्य होता है। इसे अचुम्बकीय अवस्था कहते हैं।
जब पदार्थ को बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो अणु एक ही दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं। तब पदार्थ चुम्बक बन जाता है।
नोट
अणु = छोटा चुम्बक
ध्रुव अलग नहीं होते
अव्यवस्थित अणु → अचुम्बकीय
व्यवस्थित अणु → चुम्बकीय
चुम्बकीय पद
(Magnetic Terms)
चुम्बकत्व को समझने के लिए कुछ प्रमुख चुम्बकीय पदों का ज्ञान आवश्यक है, जिनका वर्णन निम्नलिखित है—
1. ध्रुव (Pole)
चुम्बक के वे बिन्दु जहाँ चुम्बकीय बल रेखाओं की तीव्रता सबसे अधिक होती है, चुम्बकीय ध्रुव कहलाते हैं।
👉 प्रत्येक चुम्बक के दो ध्रुव होते हैं—
उत्तरी ध्रुव (North Pole)
दक्षिणी ध्रुव (South Pole)
👉 दोनों ध्रुवों की ध्रुव सामर्थ्य बराबर होती है।
2. चुम्बकीय अक्ष (Magnetic Axis)
किसी चुम्बक के उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को जोड़ने वाली काल्पनिक सीधी रेखा को चुम्बकीय अक्ष कहते हैं।
3. चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)
किसी चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र, जिसमें चुम्बकीय सूई उसके प्रभाव को अनुभव करे, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।
👉 यह क्षेत्र चुम्बकीय बल रेखाओं से बना होता है। 👉 चुम्बकीय क्षेत्र में रखी गई सूई सदैव क्षेत्र की दिशा में स्थिर हो जाती है। 👉 चुम्बकीय क्षेत्र की कल्पना माइकल फैराडे ने चुम्बकीय बल रेखाओं द्वारा की।
चुम्बकीय बल रेखाओं के गुणधर्म
चुम्बकीय बल रेखाएँ चुम्बक के बाहर उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव की ओर जाती हैं तथा चुम्बक के अन्दर दक्षिणी से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं।
सभी चुम्बकीय बल रेखाएँ बन्द परिपथ बनाती हैं।
कोई भी दो चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
चुम्बकीय बल रेखाएँ अपना परिपथ चुम्बकीय पदार्थ के माध्यम से पूरा करने का प्रयास करती हैं।
चुम्बकीय बल रेखाओं में तनाव (Tension) होता है।
जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता शून्य होती है, वहाँ कोई बल रेखा नहीं होती।
किसी बिन्दु पर बल रेखा की स्पर्श रेखा, उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।
4. चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic Flux)
चुम्बकीय क्षेत्र में किसी तल से होकर गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखाओं की कुल संख्या चुम्बकीय फ्लक्स कहलाती है।
प्रतीक : Φ (फाई)
SI मात्रक : वेबर (Weber)
अन्य मात्रक : मैक्सवेल (Maxwell)
👉 1 वेबर = 10⁸ मैक्सवेल
5. चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व
(Magnetic Flux Density)
किसी तल के इकाई क्षेत्रफल से होकर गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स, चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व कहलाता है।
प्रतीक : B
\( B=\frac{\Phi}{A} \)
जहाँ, Φ = चुम्बकीय फ्लक्स (वेबर में) A = क्षेत्रफल (मीटर² में)
👉 SI मात्रक : वेबर/मीटर² (टेस्ला)
6. चुम्बकीय प्रेरण
(Magnetic Induction)
जब किसी चुम्बक को लौह पिण्ड के पास लाया जाता है या लौह पिण्ड को चुम्बक के पास लाया जाता है, तो लौह पिण्ड में विपरीत ध्रुवता का चुम्बकत्व उत्पन्न हो जाता है। इस क्रिया को चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
👉 इस प्रक्रिया में चुम्बक और लौह पिण्ड का स्पर्श आवश्यक नहीं होता, केवल पास होना पर्याप्त है। 👉 चुम्बक, लौह पिण्ड में चुम्बकत्व प्रेरित (Induce) कर देता है। 👉 इसी कारण दोनों में आकर्षण बल उत्पन्न होता है। 👉 मोटर, जनित्र (Generator), ट्रांसफॉर्मर आदि में प्रयुक्त Pole Pieces चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करते हैं।
7. चुम्बकीय परिपथ
(Magnetic Circuit)
चुम्बकीय बल रेखाओं का पूर्ण एवं बन्द मार्ग चुम्बकीय परिपथ कहलाता है।
👉 यह एक काल्पनिक मार्ग होता है। 👉 चुम्बक के अन्दर बल रेखाएँ दक्षिणी से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं। 👉 चुम्बक के बाहर बल रेखाएँ उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव की ओर जाती हैं।
8. चुम्बकत्व वाहक बल
(Magneto Motive Force – MMF)
चुम्बकीय परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स उत्पन्न करने वाला बल, चुम्बकत्व वाहक बल कहलाता है।
MMF = N × I
जहाँ, N = कुंडली के टर्नों की संख्या I = प्रवाहित धारा (ऐम्पियर)
👉 मात्रक : ऐम्पियर-टर्न (AT)
9. रिलक्टैन्स
(Reluctance)
जैसे विद्युत परिपथ में धारा का विरोध प्रतिरोध (Resistance) करता है, वैसे ही चुम्बकीय परिपथ में चुम्बकीय फ्लक्स के प्रवाह का विरोध रिलक्टैन्स कहलाता है।
प्रतीक : Rm
मात्रक : ऐम्पियर-टर्न / वेबर
\[
R_{m}=\frac{F_{m}}{\phi}
\]
जहाँ, l = परिपथ की लम्बाई (मीटर) A = अनुप्रस्थ क्षेत्रफल (मीटर²) μ₀ = निर्वात की चुम्बकशीलता μᵣ = माध्यम की सापेक्ष चुम्बकशीलता
10. चुम्बकशीलता
(Permeability)
किसी पदार्थ की वह क्षमता जिससे वह चुम्बकीय फ्लक्स को अपने भीतर से गुजरने देता है, चुम्बकशीलता कहलाती है।
\[
\mu = \frac{B}{H}
\]
जहाँ, B = चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व (वेबर/मी² या टेस्ला) H = चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता (AT/मीटर)
👉 चुम्बकशीलता, रिलक्टैन्स के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
11. चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता
(Intensity of Magnetic Field)
चुम्बकीय क्षेत्र में रखे इकाई ध्रुव पर लगने वाला बल, उस क्षेत्र की चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता कहलाता है।
प्रतीक : H
\[
H=\frac{NI}{L}
\]
जहाँ, F = चुम्बकत्व वाहक बल (AT) l = चुंबकीय परिपथ की लम्बाई (मीटर)
👉 मात्रक : ऐम्पियर-टर्न / मीटर
12. सस्सैप्टिबिलिटी
(Magnetic Susceptibility)
किसी पदार्थ में उत्पन्न चुम्बकन तीव्रता (I) और उस पर लगाए गए चुम्बकन बल (H) के अनुपात को सस्सैप्टिबिलिटी कहते हैं।
\[
\chi_{m}=\frac{I}{H}
\]
जहाँ, K = सस्सैप्टिबिलिटी (बिना मात्रक / Dimensionless) I = चुम्बकन तीव्रता (वेबर/मीटर²) H = चुम्बकन बल या चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता (ऐम्पियर-टर्न/मीटर)
13. चुम्बकन तीव्रता
(Intensity of Magnetisation)
किसी चुम्बक की प्रति इकाई क्षेत्रफल पर ध्रुव शक्ति, उसकी चुम्बकन तीव्रता कहलाती है।
\[
I=\frac{m}{A}
\]
जहाँ, I = चुम्बकन तीव्रता (वेबर/मीटर²) m = ध्रुव सामर्थ्य (वेबर) A = ध्रुव का क्षेत्रफल (मीटर²)
. हिस्टरैसिस लूप (B–H Curve)
नीचे दर्शाया गया वक्र हिस्टरैसिस लूप कहलाता है, जिसे B–H वक्र भी कहते हैं।
जहाँ,
B : फ्लक्स घनत्व
H : चुम्बकीय क्षेत्र सामर्थ्य
संतृप्त बिन्दु (Saturation Point) : वह अवस्था जहाँ H बढ़ाने पर भी B में वृद्धि नहीं होती
सामान्य चुम्बकन वक्र : प्रारम्भिक चुम्बकन की अवस्था
अवशिष्ट चुम्बकत्व (Residual Magnetism)
चुम्बकीय पदार्थों का वह गुण, जिसमें चुम्बकीय क्षेत्र हटाने के बाद भी पदार्थ में कुछ चुम्बकत्व बना रहता है, अवशिष्ट चुम्बकत्व (Residual Magnetism) कहलाता है।
चित्र (B-H Curve) मे
OB (+ साइड अवशिष्ट चुम्बकत्व)
OE (- साइड अवशिष्ट चुम्बकत्व)
निग्राही/ विचुम्बकन बल (Coercive Force)
अवशिष्ट चुम्बकत्व (Residual Magnetism) को समाप्त करने के लिये लगाये जाने वाले बल को (Coercive Force) या विचुम्बकन बल कहते हैं।
लोहे की छड़ को पूरी तरह विचुम्बकित (Demagnetize) करने के लिए चुम्बकीय क्षेत्र को विपरीत दिशा में लगाना आवश्यक होता है।
इसके लिए सोलेनॉयड कुंडली में प्रवाहित धारा की दिशा को परिवर्ती स्विच द्वारा उलट दिया जाता है, जिससे चुम्बकीय क्षेत्र सामर्थ्य H का मान ऋणात्मक हो जाता है।
चित्र (B-H Curve) मे
OC (+ साइड मे निग्राही बल या विचुम्बकन बल)
OF (- साइड मे निग्राही बल या विचुम्बकन बल)
निग्राहिता (Coercivity )
चुम्बकन बल की वह मात्रा, जो किसी चुम्बकीय पदार्थ के अवशिष्ट चुम्बकत्व को समाप्त करने के लिए आवश्यक होता है, – उसकी निग्राहिता (coercivity) कहलाती है।
महत्वपूर्ण बिंदु
अधिक निग्राहिता ⇒ कठोर चुम्बकीय पदार्थ
कम निग्राहिता ⇒ मृदु चुम्बकीय पदार्थ
ट्रांसफॉर्मर कोर के लिए ⇒ कम हिस्टरैसिस हानि वाला पदार्थ
स्थायी चुम्बक के लिए ⇒ अधिक अवशिष्ट चुम्बकत्व और निग्राहिता
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