AC circuit (प्रत्यावर्ती धारा परिपथ) ITI Electrician ट्रेड का सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक है। National Council for Vocational Training की ऑनलाइन परीक्षा में AC circuit से सीधे theory, numerical और concept-based प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
भारत सहित अधिकांश देशों में विद्युत शक्ति की आपूर्ति प्रत्यावर्ती धारा (AC) प्रणाली से की जाती है। यद्यपि दिष्ट धारा (DC) का इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विशेष महत्व है, परंतु बड़े पैमाने पर विद्युत पारेषण और वितरण के लिए AC अधिक उपयुक्त है, क्योंकि इसमें वोल्टेज को आसानी से बढ़ाया (step-up) और घटाया (step-down) जा सकता है।
वह विद्युत धारा जिसका मान और दिशा समय के साथ बदलती रहती है, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है।
✔ यह निश्चित समय के बाद अपनी दिशा बदलती रहती है। ✔ इसे आल्टरनेटर द्वारा उत्पन्न किया जाता है। ✔ घरेलू सप्लाई और उद्योगों में AC का उपयोग होता है।
उदाहरण: घर की बिजली सप्लाई
2. दिष्ट धारा (Direct Current – DC)
वह धारा जिसका मान और दिशा स्थिर रहती है, दिष्ट धारा कहलाती है।
✔ यह केवल एक दिशा में बहती है। ✔ सेल और बैटरी से प्राप्त होती है। ✔ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग होती है।
उदाहरण: बैटरी की धारा
AC के गुण (Merits of AC over DC)
कम लागत पर पारेषण AC को उच्च वोल्टेज पर भेजा जाता है जिससे धारा कम रहती है। कम धारा के कारण पतले तार उपयोग होते हैं और ताँबा/एल्युमीनियम की बचत होती है, इसलिए पारेषण सस्ता होता है।
उच्च वोल्टेज पर उत्पादन संभव AC का उत्पादन बहुत उच्च वोल्टेज पर किया जा सकता है, जिससे लंबी दूरी तक बिजली भेजना आसान होता है।
वोल्टेज परिवर्तन आसान ट्रांसफॉर्मर की सहायता से AC वोल्टेज को आसानी से बढ़ाया (step-up) या घटाया (step-down) जा सकता है, और इसमें ऊर्जा हानि कम होती है।
सरल व मजबूत मशीनें AC मोटर और उपकरणों की बनावट सरल होती है, रखरखाव कम लगता है और ये अधिक टिकाऊ होते हैं।
DC में आसानी से बदली जा सकती है रेक्टिफायर द्वारा AC को आसानी से DC में बदला जा सकता है, इसलिए दोनों प्रकार के उपयोग संभव हैं।
AC के अवगुण (Demerits of AC over DC)
सीमित चुम्बकीय प्रभाव AC की दिशा निरंतर बदलती रहती है, इसलिए इससे स्थायी विद्युत-चुम्बक बनाना कठिन होता है।
उच्च इंसुलेशन की आवश्यकता AC का शिखर वोल्टेज अधिक होता है, इसलिए उच्च परावैद्युत सामर्थ्य वाले इंसुलेटर की जरूरत पड़ती है, जिससे लागत बढ़ती है।
अर्थिंग अनिवार्य मानव सुरक्षा और उपकरणों की रक्षा के लिए AC प्रणाली में उचित अर्थिंग आवश्यक है।
सीधा उपयोग हर जगह संभव नहीं इलेक्ट्रोप्लेटिंग, बैटरी चार्जिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि कार्य सीधे AC से नहीं किए जा सकते — पहले DC में बदलना पड़ता है।
लाइन हानियाँ और हस्तक्षेप AC में इंडक्टेंस और कैपेसिटेंस के कारण रिएक्टिव लॉस, वोल्टेज ड्रॉप और संचार लाइनों में इंटरफेरेंस की समस्या हो सकती है।
ए.सी. सम्बन्धी पद (Terms Related to AC)
1. ज्या तरंग (Sine Wave)
प्रत्यावर्ती धारा या वोल्टेज के ज्या मानों से बनी तरंग को ज्या तरंग कहते हैं। आल्टरनेटर द्वारा उत्पन्न AC सामान्यतः ज्या तरंग होती है।
2. चक्र (Cycle)
धारा या वोल्टेज के मान और दिशा का एक पूर्ण परिवर्तन एक चक्र कहलाता है। एक चक्र = 360°
3. आवृत्ति (Frequency)
एक सेकण्ड में पूरे किए गए चक्रों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।
:
$$ f = \frac{1}{T} $$
जहाँ — f = आवृत्ति (हर्ट्ज, Hz) T = आवर्तकाल / समय अवधि (सेकंड)
प्रतीक: f
मात्रक: हर्ट्ज (Hz)
भारत में सप्लाई आवृत्ति: 50 Hz
अर्थात AC धारा एक सेकण्ड में 50 बार दिशा बदलती है।
4. समय अन्तराल (Time Period)
एक चक्र पूरा करने में लगा समय समय अन्तराल कहलाता है।
आवर्तकाल (Time Period) का सूत्र:
$$ T = \frac{1}{f} $$
जहाँ T = समय अन्तराल f = आवृत्ति
5. आयाम (Amplitude)
माध्य स्तर से धन या ऋण दिशा में प्राप्त अधिकतम मान को आयाम कहते हैं।
6. तात्कालिक मान (Instantaneous Value)
किसी भी क्षण पर धारा या वोल्टेज का मान तात्कालिक मान कहलाता है।
7. शिखर मान (Peak Value)
धारा या वोल्टेज का अधिकतम मान शिखर मान कहलाता है। इसे ����Imax या ����Emax से दर्शाते हैं।
8. RMS मान (Root Mean Square Value)
RMS मान ए.सी. का प्रभावी मान है। यह वह मान है जो समान समय में डी.सी. जितनी ही ऊष्मा उत्पन्न करता है।
RMS Value Formula
RMS मान का सूत्र (AC sine wave):
Irms = Imax / √2 = 0.707 × Imax
अधिकांश विद्युत मापक यंत्र RMS मान ही दर्शाते हैं।
9. औसत मान (Average Value)
आधे चक्र के तात्कालिक मानों का औसत औसत मान कहलाता है।
Iavg = 0.637 × Imax
पूरे चक्र का औसत मान शून्य होता है।
10. पीक फैक्टर (Peak Factor / Crest Factor)
शिखर मान और RMS मान का अनुपात पीक फैक्टर (Peak Factor) कहलाता है।
प्रत्यावर्ती धारा (AC) परिपथों को समझने के लिए फेज (Phase) की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। फेज दो ए.सी. राशियों — सामान्यतः धारा (I) और वोल्टेज (E) — की आपसी सापेक्ष स्थिति को दर्शाता है। इससे पता चलता है कि दोनों राशियाँ समय के साथ एक-दूसरे के मुकाबले कहाँ स्थित हैं।
इन-फेज (In-phase)
जब धारा और वोल्टेज:
साथ-साथ बढ़ते और घटते हैं
एक ही समय शिखर मान पर पहुँचते हैं
दोनों के बीच फेज कोण = 0°
तो वे इन-फेज कहलाते हैं। इस स्थिति में ऊर्जा का उपयोग सर्वाधिक प्रभावी होता है।
आउट-ऑफ-फेज (Out-of-phase)
जब धारा और वोल्टेज अलग-अलग समय पर अपने शिखर मान पर पहुँचते हैं, तो वे आउट-ऑफ-फेज कहलाते हैं।
उनके बीच कोणीय अन्तर होता है
इस अन्तर को फेज कोण (θ) कहते हैं
θ डिग्री में मापा जाता है
उदाहरण: यदि धारा वोल्टेज से 60° बाद शिखर पर पहुँचे, तो वे 60° आउट-ऑफ-फेज हैं।
क्वाड्रेचर राशियाँ (Quadrature)
यदि दो राशियों के बीच फेज अन्तर 90° हो → वे क्वाड्रेचर कहलाती हैं।
एन्टी-फेज राशियाँ (Anti-phase)
यदि फेज अन्तर 180° हो → वे एन्टी-फेज कहलाती हैं। इस स्थिति में एक राशि धन होने पर दूसरी ऋण होती है।
कलान्तर (Phase Difference)
दो प्रत्यावर्ती राशियों के शिखर मान प्राप्त करने के समय के अन्तर को कलान्तर कहते हैं।
प्रतीक: θ
मात्रक: डिग्री
अग्रगामी एवं पश्चगामी राशियाँ
(Leading & Lagging)
जो राशि पहले शिखर पर पहुँचे → अग्रगामी (Leading)
जो बाद में पहुँचे → पश्चगामी (Lagging)
उदाहरण: यदि वोल्टेज पहले पहुँचे → वोल्टेज अग्रगामी धारा बाद में पहुँचे → धारा पश्चगामी
AC Circuit का NCVT Online परीक्षा में महत्व
AC circuit विद्युत प्रणाली की रीढ़ है क्योंकि घरों, उद्योगों और पावर वितरण में यही उपयोग होता है। ITI Electrician के लिए यह fundamental topic है। National Council for Vocational Training परीक्षा में RMS, phase, impedance और power factor से जुड़े प्रश्न अक्सर आते हैं। AC circuit समझने से practical wiring, troubleshooting और numericals आसान हो जाते हैं, जिससे परीक्षा और नौकरी दोनों में फायदा मिलता है।
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FAQs
AC circuit क्या होता है?
AC circuit वह परिपथ है जिसमें धारा और वोल्टेज समय के साथ दिशा और मान बदलते रहते हैं। यह sine wave के रूप में प्रवाहित होती है।
RMS मान क्या है?
RMS (Root Mean Square) मान AC का प्रभावी मान होता है, जो DC के बराबर heating effect देता है। Irms = 0.707 × Imax
Average value क्या है?
AC के आधे चक्र का औसत मान average value कहलाता है। Iavg = 0.637 × Imax
Frequency क्या होती है?
1 सेकंड में पूरे चक्रों की संख्या frequency कहलाती है। Unit = Hertz (Hz)
Phase क्या है?
दो AC राशियों (जैसे V और I) की आपसी स्थिति को phase कहते हैं।
Peak factor क्या है?
Peak factor = Peak value / RMS value Peak factor बताता है कि waveform का अधिकतम मान RMS से कितना बड़ा है।
sine wave का Peak factor कितना होता है?
Peak factor = 1.414
Form factor क्या है?
Form factor = RMS value / Average value यह waveform के आकार (shape) को दर्शाता है।