कृत्रिम श्वसन (Artificial Respiration) एक ऐसी जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की साँस रुक जाती है या वह स्वतः श्वास नहीं ले पा रहा होता। यह तकनीक शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है ताकि मस्तिष्क और अन्य अंगों को नुकसान न हो।
यह प्रक्रिया विशेष रूप से डूबने, बिजली के झटके, हार्ट अटैक, गैस चोकिंग, या बेहोशी जैसी स्थितियों में प्रयोग की जाती है। यदि समय रहते कृत्रिम श्वसन दी जाए, तो यह किसी की जान बचा सकती है।
NCVT Online (ITI Electrician / Fitter / Health & Safety related trades) परीक्षा में Artificial Respiration (कृत्रिम श्वसन) से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं।
Silvester विधि एक कृत्रिम श्वसन (Artificial Respiration) की प्रक्रिया है जिसमें पीड़ित व्यक्ति के हाथों को आगे-पीछे करके उसके फेफड़ों में हवा भरने और निकालने का काम किया जाता है।
यह तकनीक आजकल ज्यादा प्रचलित नहीं है, लेकिन यह कुछ परिस्थितियों में mouth-to-mouth की जगह उपयोगी हो सकती है, जैसे:
जब मुंह से मुंह साँस देना संभव नहीं हो
कई पीड़ित हों और संसाधन सीमित हों
बचावकर्ता को मुंह से साँस देने में असहजता हो
Silvester Method करने की विधि
✅ Step 1: व्यक्ति को सही पोजीशन में लिटाएं
पीड़ित को सीधे पीठ के बल लेटाएं।
एक रोल किया हुआ कपड़ा या तकिया कंधों के नीचे रखें ताकि सिर पीछे झुक जाए और एयरवे खुल जाए।
✅ Step 2: अपने घुटनों के बल बैठें
पीड़ित के सिर के पीछे बैठ जाएं ताकि आप उसके दोनों हाथों को पकड़ सकें।
✅ Step 3: हाथों को छाती पर दबाना (Exhalation = सांस बाहर निकालना)
अब दोनों हाथों को धीरे से छाती पर वापस लाएं और थोड़ा दबाव डालें ताकि हवा बाहर निकले।
इसे भी 2 सेकंड तक करें।
✅ Step 4: हाथों को ऊपर उठाना (Inhalation = सांस अंदर लेना)
दोनों हाथों को कंधे के पास से पकड़ें और सिर की ओर ऊपर उठाएं।
इससे छाती फैलती है और फेफड़ों में हवा जाती है।
इसे लगभग 2 सेकंड तक करें।
✅ Step 5: दोहराएं
इस प्रक्रिया को हर 4-5 सेकंड में दोहराएं यानी लगभग 12–15 बार प्रति मिनट।
⏱️ कब तक करें?
जब तक व्यक्ति खुद से सांस लेना शुरू न कर दे
अगर संभव हो तो mouth-to-mouth या CPR को प्राथमिकता दें, क्योंकि वे ज्यादा प्रभावी हैं।
Silvester method उन जगहों पर कारगर हो सकती है जहां कोई और विकल्प नहीं है।
Scaffer Method (शैफ़र विधि)
Shaffer Method Artificial Respiration की मैनुअल तकनीक है जिसमें पीड़ित को पेट के बल लिटाकर छाती को दबाने के माध्यम से सांस लेने की प्रक्रिया दोहराई जाती है।
इसे कभी-कभी “Prone Pressure Method” भी कहा जाता है।
✅ Shaffer Method का उद्देश्य:
डूबे हुए व्यक्ति या दम घुटने की स्थिति में फेफड़ों से पानी या हवा निकालना और फिर ऑक्सीजन अंदर भेजना।
Mouth-to-Mouth Respiration (मुँह से मुँह श्वसन) एक कृत्रिम श्वसन (Artificial Respiration) की तकनीक है, जिसका प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति साँस लेना बंद कर देता है और उसे तुरंत ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है।
❓ कब ज़रूरत पड़ती है?
बिजली का झटका लगने पर
दम घुटने या गैस से बेहोशी की स्थिति में
हार्ट अटैक के बाद
एक्सीडेंट या बेहोशी की हालत में जब व्यक्ति साँस नहीं ले रहा हो
डूबने के बाद
✅ कैसे करें Mouth-to-Mouth Respiration
🟢 Step 1: सुरक्षा जांचें
पहले यह सुनिश्चित करें कि आप खुद सुरक्षित हैं।
व्यक्ति को सपाट जगह पर पीठ के बल लिटाएं।
🟢 Step 2: एयरवे खोलें (Airway Open करें)
सिर को पीछे झुकाएं और ठुड्डी ऊपर उठाएं – इस तकनीक को Head Tilt, Chin Lift कहा जाता है।
यह वायुमार्ग (Airway) खोलने में मदद करता है।
🟢 Step 3: साँस और प्रतिक्रिया जांचें
सीने का उतार-चढ़ाव देखें।
मुँह के पास कान ले जाकर साँस की आवाज़ या गर्म हवा महसूस करें।
🟢 Step 4: मुँह से मुँह श्वसन दें
व्यक्ति की नाक को दो उंगलियों से बंद करें।
अपना मुँह पूरी तरह से पीड़ित के मुँह पर रखें ताकि हवा बाहर न जाए।
धीरे-धीरे गहरी साँस फूंकें (लगभग 1 सेकंड तक)।
देखें कि छाती ऊपर उठ रही है या नहीं।
🟢 Step 5: प्रक्रिया दोहराएं
हर 5 सेकंड में 1 बार (12 बार प्रति मिनट) साँस फूंकें।
CPR के साथ करें तो: 👉 30 छाती के दबाव (compressions) + 2 साँसे यह चक्र बार-बार दोहराएं जब तक मदद न आ जाए या व्यक्ति होश में न आ जाए।
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियाँ:
अगर मुँह से साँस देना संभव न हो (जैसे चोट, मुंह बंद है), तो mouth-to-nose तरीका अपनाया जा सकता है।
यदि मुँह में कुछ अटका हो, तो पहले उसे हटाएं।
संक्रमित बीमारियों के डर से CPR मास्क का प्रयोग किया जा सकता है।
Mouth-to-Nose Respiration (मुँह से नाक के माध्यम से कृत्रिम श्वसन) भी एक बेहद जरूरी और प्रभावी तकनीक है, खासकर जब पीड़ित का मुँह किसी कारण से खुल नहीं पा रहा हो या गंभीर रूप से चोटिल हो।
👃 मुँह से नाक श्वसन (Mouth-to-Nose Respiration)
यह एक प्रकार का कृत्रिम श्वसन (Artificial Respiration) है, जिसमें बचावकर्ता पीड़ित के मुँह को बंद करके नाक में साँस फूंकता है ताकि फेफड़ों में ऑक्सीजन पहुँच सके।
✅ कब उपयोग करें?
जब मुँह चोटिल, टाइट बंद, या ब्लॉक हो।
जब mouth-to-mouth तकनीक संभव न हो।
छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं में यह ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है।
🧑⚕️ मुँह से नाक श्वसन कैसे दें?
🟢 Step 1: व्यक्ति को लिटाएं
पीड़ित को सीधे पीठ के बल लिटाएं।
सिर को पीछे की ओर झुकाएं और ठुड्डी को थोड़ा ऊपर उठाएं (Head Tilt – Chin Lift)।
🟢 Step 2: मुँह बंद करें
अपने हाथ से पीड़ित का मुँह बंद करें ताकि साँस बाहर न निकल सके।
🟢 Step 3: नाक में साँस दें
अपना मुँह व्यक्ति की नाक पर पूरी तरह से लगाए।
धीरे-धीरे एक गहरी साँस फूंकें (लगभग 1 सेकंड तक)।
देखें कि छाती ऊपर उठ रही है या नहीं।
🟢 Step 4: साँस हटाएं और छाती गिरने दें
नाक से मुँह हटाएं और मुँह को थोड़ा खोलने दें, जिससे हवा बाहर जा सके।
🔁 Step 5: प्रक्रिया दोहराएं
हर 5 सेकंड में एक साँस दें (12 बार प्रति मिनट)।
अगर CPR कर रहे हैं तो: ➡️ 30 छाती दबाव (compressions) + 2 साँसे नाक से इस चक्र को तब तक दोहराएं जब तक व्यक्ति सांस न लेने लगे या मदद न पहुँचे।
⚠️ सावधानियाँ:
मुँह को अच्छी तरह से बंद रखें ताकि हवा नाक से ही अंदर जाए।
यदि मुँह से भी साँस लीक हो रही है, तो मुँह को ठीक से बंद करें।
बच्चे या नवजात के लिए साँस बहुत धीरे और कम मात्रा में दें।
🟢 Nelson Method (नेल्सन विधि)
Nelson Method भी कृत्रिम श्वसन देने की एक पुरानी तकनीक है।
इसका उपयोग तब किया जाता है जब पीड़ित की साँस बंद हो गई हो और mouth-to-mouth संभव न हो।
इस विधि में पीड़ित की पीठ पर दबाव डालकर तथा छोड़कर फेफड़ों में हवा भरने और बाहर निकालने की क्रिया कराई जाती है।
📌 करने की विधि (Steps)
1. स्थिति (Position)
पीड़ित को पेट के बल (prone position) उल्टा लिटाएँ।
हाथों को सिर के नीचे या एक तरफ मोड़कर रख दें।
मुँह और नाक का रास्ता साफ़ कर दें।
2. बचावकर्ता की स्थिति
सहायक (helper) पीड़ित की पीठ पर बैठता है या उसके बगल में घुटनों के बल रहता है।
3. Exhalation (साँस बाहर निकालना)
दोनों हथेलियाँ पीड़ित की पीठ (rib cage के ऊपर वाले हिस्से) पर रखकर हल्का दबाव डालें।
दबाव से छाती संकुचित होती है और फेफड़ों की हवा बाहर निकलती है।
दबाव लगभग 2–3 सेकंड तक बनाएँ।
4. Inhalation (साँस अंदर लेना)
अब दबाव हटाएँ और पीठ को छोड़ दें।
जैसे ही दबाव हटता है, छाती फैलती है और हवा फेफड़ों में भरती है।
यह अवस्था लगभग 2 सेकंड तक रहने दें।
5. दोहराव (Repetition)
यह प्रक्रिया हर 4–5 सेकंड में दोहराएँ।
यानी लगभग 12–15 बार प्रति मिनट।
📌 सावधानियाँ
दबाव बहुत ज़्यादा न डालें, वरना चोट लग सकती है।
मुँह और नाक हमेशा खुले रहें, ताकि हवा का आवागमन हो सके।
आधुनिक CPR और mouth-to-mouth की तुलना में यह विधि कम प्रभावी है।
इसे केवल तभी प्रयोग करें जब अन्य विधियाँ संभव न हों।
CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) एक आपातकालीन प्रक्रिया है जिसमें हम किसी बेहोश व्यक्ति को सीने पर दबाव (Chest Compressions) और साँस (Breaths) देकर फिर से दिल और फेफड़ों को चालू करने की कोशिश करते हैं।
🆘 CPR की ज़रूरत कब होती है?
दिल का दौरा (Heart Attack)
डूबने की घटना
बिजली का झटका
दम घुटना
बेहोशी और सांस बंद होना
दुर्घटना के बाद सांस और धड़कन रुकना
🧑⚕️ CPR कैसे दें? (CPR Steps)
(इस प्रक्रिया को A-B-C कहा जाता है – Airway, Breathing , Circulation )
🔴 Step 1: सुरक्षा जांचें और प्रतिक्रिया लें
पहले खुद की और घायल की सुरक्षा जांचें।
व्यक्ति को जोर से आवाज़ देकर देखें: “क्या आप ठीक हैं?”
कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर एम्बुलेंस को कॉल करें (108)।
🔴 Step 2: साँस और धड़कन जांचें
मुँह के पास कान रखें – साँस की आवाज़ और सीने का उतार-चढ़ाव देखें।
अगर 10 सेकंड तक कोई साँस नहीं है → CPR शुरू करें।
🔴 Step 3: Chest Compressions (छाती पर दबाव देना)
व्यक्ति को पीठ के बल सख्त सतह पर लिटाएं।
अपने दोनों हाथों को एक-दूसरे पर रखें, उंगलियां आपस में जोड़ें।
हाथों को सीने के बीचों-बीच (ब्रेस्टबोन पर) रखें।
कोहनियों को सीधा रखें और तेजी से 5-6 सेंटीमीटर गहराई तक दबाव डालें।
गति होनी चाहिए लगभग 100–120 दबाव प्रति मिनट।
🔴 Step 4: Airway खोलें
सिर को पीछे झुकाएं और ठुड्डी ऊपर उठाएं (Head Tilt – Chin Lift)।
🔴 Step 5: Breathing (साँस देना)
मुँह से मुँह (या मुँह से नाक) साँस दें।
हर साँस लगभग 1 सेकंड तक होनी चाहिए।
2 बार साँसे दें और फिर 30 compressions करें।
🔴 Step 6: Circulation
ये चक्र तब तक दोहराएं जब तक:
व्यक्ति सांस लेने लगे
मेडिकल सहायता पहुँच जाए
आप थक न जाएं
⚠️ सावधानियाँ:
ज्यादा तेज़ या गहरे दबाव से पसलियाँ टूट सकती हैं, लेकिन जान बचाना प्राथमिक है।
बिना प्रशिक्षण के भी केवल छाती दबाना (Hands-only CPR) किया जा सकता है।