वैद्युतिक मशीनें सामान्यतः विद्युत चुम्बकीय प्रभाव (electro-magnetic effect) पर आधारित होती है। जैसे-वैद्युतिक मोटर्स एवं वैद्युतिक जनित्र इत्यादि। एक वैद्युतिक मोटर, वैद्युतिक ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में जबकि एक वैद्युतिक जनित्र, यान्त्रिक ऊर्जा को वैद्युतिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
Construction of DC Generator के बारे मे नीचे बताया गया है
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1 योक
जनित्र के बाह्य भाग को योक या बॉडी कहते हैं। यह कास्ट आयरन अथवा कास्ट स्टील से बनाई जाती है। छोटे जनित्रों की बॉडी प्रायः कास्ट आयरन से एवं बड़े जनित्रों की बॉडी, कास्ट स्टील से बनाई जाती है। योक या बॉडी में साइड कवर फिट होते हैं। उनमें बियरिंग का स्थान बना होता है, जिससे आर्मेचर की शाफ्ट घूम सके।
बाँडी के ऊपर टर्मिनल बॉक्स लगा होता है, जिसके अन्दर फोल्ड पोल्स लगे होते हैं। बॉडी के दोनों ओर दो साइड प्लेट्स होती हैं, जो मशीन को पूरी तरह ढक देती है
2 फील्ड पोल
छोटे आकार वाले डायनमो में चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित करने के लिए स्थावे चुम्बक प्रयोग किए जाते हैं, परन्तु बड़े आकार वाले डायनमो तथा तो जनित्र में इस कार्य हेतु फील्ड पोल्स प्रयोग किए जाते हैं। इसके मुख्य भार पोल शु, सॉलिड पोल कोर आदि लगे होते हैं। इन्हें बॉडी के अन्दर मुख्य पेल के रूप में बोल्ट की सहायता से कसा जाता है। ये सिलिकॉन स्टोल को लेमिनेटेड कोर द्वारा बनाए आते हैं
फोल्ड पोल्स दो प्रकार के होते हैं किसका विवरण निम्न प्रकार है
शू सहित लेमिनेटेड पोल (Laminated Pole with Shoe)
इस प्रकार के पोल में, पोल तथा पोल-शू दोनों हो एक साथ लेमिनेटेड कार स्टॉल अथवा एनील्ड स्टील से बनाए जाते हैं। इन पर फोल्ड-आरि स्थापित करके इन्हें बोल्ट्स के द्वारा योक पर कस दिया जाता है। निम्न बि में शू सहित लेमिनेटेड पोल दर्शाया गया है। बड़ी मशीनो में प्रायः इसी प्रका के पोल प्रयोग किये जाते हैं।
पोल की अपेक्षा, पोल-शू का आकार (प्रभावी क्षेत्रफल) लगभग दो हु रखा जाता है, जिसके दो लाभ हैं
- फील्ड क्यॉयल पोल से बाहर नहीं जा सकती।
- पोल-शू द्वारा उत्पन्न किया गया चुम्बकीय क्षेत्र, अधिक फैला हुआ होता है।
मोल्डेड पोल (Moulded Pole)
इस प्रकार के पोल, योक के साथ ही भोल्डिग द्वारा बनाए जाते हैं। ये पोत प्रायः कास्ट-आयरन से निर्मित होते हैं। पोल के ऊपर फोल्ड वाइडा स्थापित करके एक लेमिनेटेड पोल-शू पेचों द्वारा कस दिया जाता है कि अग्रपृष्ठ पर चित्र में दर्शाया गया है। छोटी मशीनों में प्रायः इसी प्रकार के पोल का प्रयोग किया जाता है।
फोल्ड पोल्स की न्यूनतम संख्या दो तथा अधिकतम संख्या 8 होती है। फोल्ड पोल्स का मुख्य कार्य जनित्र में चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित करना है।
3 आर्मेचर
मोटर का घूर्णन करने वाला भाग आर्मेचर होता है। इसका आकार एक बेलनाकार ड्रम जैसा होता है, जो सिलिकॉन स्टील की पत्तियों (लेमिनेशन्स) को एक साथ रिवेट करके बनाया जाता है। आर्मेचर ड्रम में, आर्मेचर क्वॉयल्स स्थापित करने के लिए स्लॉट कटे होते हैं।
स्लॉट मुख्यतः निम्न तीन प्रकार के होते हैं
- खुले स्लॉट (Open slot) – इन स्लॉट की चौड़ाई समान रहती है।
- अर्द्ध-बन्द स्लॉट (Semi-closed slot) -इस प्रकार के स्लॉट की चौड़ाई शीर्ष पर कम होती है।
बन्द स्लॉट (Closed slot) – इस प्रकार के स्लॉट छिद्र के आकार के होते हैं और इनमें सीधे ही आर्मेचर क्वॉयल नहीं फैसाई जा सकती, अपितु उन्हें छिद्रों में वाइण्ड करना पड़ता है।
आर्मेचर कोर को लेमिनेटेड बनाया जाता है, जिससे उनमें हिस्टरैसिस क्षति तथा एडी धारा क्षति का मान कम रहे। पत्तियों (लेमिनेशन्स) की मोटाई 0.35 से 0.6 मिमी तक होती है।
आर्मेचर का उपयोग Use of Armature
डी.सी. मशीनों में आर्मेचर का उपयोग मुख्य रूप से चुम्बकीय फ्लक्स का छेदन करके उसमें स्थापित आमेचर वाइण्डिग्स में वि.वा.ब. उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। आर्मेचर को डी.सी. मशीन की शाफ्ट पर कस दिया जाता है और शाफ्ट को बियरिंग्स की सहायता से बॉडी में स्थापित कर दिया जाता है।
4 लेमिनेटेड कोर
लेमिनेटेड कोर को आर्मेचर कोर भी कहा जाता है।, इसमें वायु प्रविष्ट कराने के लिए अनेक वायु छिद्र बने होते हैं। इसके अतिरिक्त मध्य में शाफ्ट के लिए एक अन्य गोल छिद्र भी बना होता है, जिसे की वे कहते हैं
एडी धारा हानि तथा भंवर धारा हानि को कम करने के लिए प्रत्येक लेमिनेटेड कोर परस्पर इन्सुलेटेड होती हैं। एडी धारा हानियों, लेमिनेटेड कोर की मोटाई पर निर्भर करती हैं अतः इन्हें कम करने के लिए लेमिनेटेड कोर पतली बनाई जाती है।
5.कम्यूटेटर
यह आकार में वृत्ताकार होता है, जो हार्ड डॉन ताँबे की मोटी पत्तियों को बैकेलाइट के आधार पर कस कर बनाया जाता है। पत्तियों के बीच में रिक्त स्थान होता है, जिसमें अभ्रक भर दिया जाता है। कम्यूटेटर को आर्मेचर शाफ्ट पर स्थापित किया जाता है। इसकी पत्तियों के सिरों पर आर्मेचर वाइण्डिग्स के सिरे सोल्डर कर दिए जाते हैं। इसका मुख्य कार्य आर्मेचर क्वॉयल्स में उत्पन्न हुए वि.वा.ब. को डी.सी. के रूप में बाह्य परिपथ को प्रदान करना है।
इसमें ताँबे की पत्तियाँ ‘V’ आकार में लगाई जाती है, जिससे मशीन के घूमने पर उत्पन्न अपकेन्द्री बल के कारण ये पत्तियों बाहर न निकले। ये ताँबे की पत्तियाँ, संख्या में आर्मेचर क्वॉयल्स के बराबर होती हैं एवं इनका पिछला उभरा हुआ भाग, जिस पर आर्मेचर वाइण्डिग्स जुड़ी होती है. राइजर या लग कहलाता है।
6. फील्ड क्वॉयल
डी.सी. जनित्र के स्टेटर भाग में प्रयुक्त बॉडी के आन्तरिक भाग में लगे पोल्स के ऊपर, सुपर इनेमल तार के द्वारा, उचित आकृति के फर्मों में फील्ड क्वॉयल फिट की जाती है। फील्ड क्वॉयल को रोके रखने (hold) का कार्य लेमिनेटेड पोल शू द्वारा किया जाता है
फील्ड क्वॉयल बनाने में प्रयुक्त तार की मोटाई, डी.सी. जनित्र के प्रकार पर निर्भर करती है। यदि प्रयुक्त डी.सी. जनित्र, सीरीज डी.सी. जनित्र है, तो क्वॉयल मोटे तारों की और यदि डी.सी. शण्ट जनित्र है, तो पतले तार की क्वॉयल प्रयोग की जाती है। दोनों फील्ड क्वॉयल पर एम्पायर टेप अथवा कॉटन टेप की टेपिंग करने के पश्चात् इन्हें एक ही पोल पर फिट कर दिया जाता है।
7. ब्रश तथा ब्रश-होल्डर
डी.सी. जनित्र द्वारा उत्पन्न वि.वा.ब. को कम्यूटेटर से बाह्य परिपथ को प्रदान करने के लिए जो युक्ति प्रयोग की जाती है, वह ब्रश कहलाती है। ब्रश को ब्रश होल्डर में लगाया जाता है। छोटे जनित्रों में कार्बन ब्रश प्रयोग किया जाता है और बड़े जनित्रों में कार्बन व ताँबे के मिश्रण से बना ब्ररा प्रयोग किया जाता है।
कम्यूटेटर का मुख्य कार्य है कम्यूटेटर के साथ ‘फिसलता हुआ सम्पर्क’ स्थापित करना। ब्रश, आयताकार होता है और इसे आयताकार पीतल के होनों ओर से खुले बॉक्स में लगा दिया जाता है।
कम्यूटेटर पर ब्रश का दबाव बनाए रखने के लिए एक स्प्रिंग-पत्ती होती है। इस स्प्रिंग का दबाव 6.1 से 0.25 किग्रा प्रति वर्ग सेमी तक रखा जाता है।
कार्बन-ब्रश प्रयोग करने के कारण
- कार्बन ऐसा पदार्थ है, जो ऑक्सीकृत नहीं होता और इस प्रकार कम्यूटेटर से सदैव अच्छा संयोजन बनाए रखता है।
- अधिक तापमान पर भी कार्बन उपयुक्त तरीके से कार्य कर सकता है, क्योंकि कम्यूटेटर के साथ घर्षणरत् रहने के कारण ब्रश काफी गर्म हो जाते हैं। अतः ब्रश बनाने के लिए अधिक तापमान सह सकने वाले पदार्थ का प्रयोग किया जाता है।
इसे सरलता से आवश्यक आकृति प्रदान की जा सकती है।
कार्बन का प्रमुख अवगुण उच्च प्रतिरोध है, परन्तु यह अवगुण भी कार्य के दौरान दूर हो जाता है, क्योकि तापमान बढ़ने से इसका प्रतिरोध घट जाता है।
कार्बन की विद्युत धारा वहन क्षमता 4 से 6 ऐम्पियर प्रति वर्ग सेमी होती है, जो डी.सी. जनित्र के लिए उपयुक्त है। 6. कार्बन, एक नर्म पदार्थ होने के कारण स्वयं घिस जाता है, कम्यूटेटर को नहीं घिसने देता। परन्तु
8. ब्रश-लीड Brush-Lead
ब्रश के साथ जोड़ा गया फ्लेक्सिबल तार का टुकड़ा, ब्रश-लीड या पिग-टेल कहलाता है। तार का यह टुकड़ा ब्रश का सम्बन्ध, बाह्य परिपय से स्थापित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
9. रॉकर प्लेट Rocker Plate
यह छल्ले के आकार की एक है, जो फ्रन्ट एण्ड प्लेट के साथ बस का आकार की एक पलेट होती है, जो फल्टर फंसा दिए जाते हैं या पैचों से कस दिए जाते हैं। रॉकर प्लेट में स्टड (लम्बे खाँचे) बने होते हैं, जो बोल्ट्स को डीला करके ब्रश होल्डर्स को समायोजित करने की रोग्यता प्रदान करते हैं।
10. एण्ड कवर End Cover
जनित्र की बॉडी के दोनों ओर दो कास्ट आयरन से बने ढक्कन लगाए जाते हैं। इनमें बियरिंग लगी होती है और जनित्र को ठण्डा रखने के लिए कुछ छिद्र बने होते हैं, इन्हें एण्ड प्लेट भी कहते हैं।
कम्यूटेटर की तरफ वाले कवर को फ्रन्ट एण्ड कवर तथा दूसरे कवर को रियर-एण्ड कवर कहते हैं।
11. बियरिंग Bearing
आर्मेचर शाफ्ट को बियरिंग के द्वारा एण्ड प्लेट्स पर कसा जाता है। मशीनों में प्रायः दो प्रकार के बियरिंग प्रयोग किए जाते हैं। छोटे जनित्रों में बुश-बियरिंग प्रयोग की जाती हैं और बड़े जनित्रों में बॉल-बियरिंग अथवा रोलर-बियरिंग प्रयोग की जाती है।
बियरिंग्स का मुख्य कार्य आर्मेचर शाफ्ट को तीव्र गति पर घूमने की स्वतन्त्रता प्रदान करना है। बियरिंग्स के स्नेहन के लिए सिन्थैटिक ऑयल का उपयोग किया जाता है।
12. शाफ्ट तथा पुली Shaft and Pulley
आर्मेचर तथा कम्यूटेटर के लिए यह आधार का कार्य करती है। इसे बियरिंग्स के द्वारा एण्ड प्लेट्स पर कस दिया जाता है। यह नर्म लोहे की बनी होती है। शाफ्ट के एक सिरे पर एक पुली कस दी जाती है, जो मशीन को चलाने के लिए उसे टरबाइन आदि से जोड़ने के लिए प्रयोग की जाती है।
13. कूलिंग फैन Cooling-Fan
मशीन को ठण्डा रखने के लिए आर्मेचर पर, कम्यूटेटर वाले सिरे के विपरीत सिरे पर, एक कास्ट आयरन का बना पंखा लगाया जाता है। जैसे ही आमेंबर घूमना प्रारम्भ करता है, यह पंखा भी घूमने लगता है और ठण्डी हवा देकर जनित्र को ठण्डा रखता है।
14. बैड प्लेट Bed Plate
जनित्र के आधार को बैंड-प्लेट कहते हैं। यह कास्ट आयरन से बनाई जाती है और इसे बोल्ट्स के द्वारा ‘फाउण्डेशन’ पर कस दिया जाता है।
15. आई-बोल्ट Eye-Bolt
जनित्र को उठाने के लिए प्रायः उसकी बॉडी पर एक गोल छिद्र वाला हुक लगाया जाता है, जिसे आई-बोल्ट कहते हैं।
16. टर्मिनल-बॉक्स Terminal-Box
जनित्र की बॉडी पर बैकेलाइट की एक मोटी शीट लगी होती है, जिस पर नट-बोल्ट के द्वारा आर्मेचर-कम्यूटेटर के संयोजक सिरे कसे होते हैं, यह व्यवस्था इसका मुख्य कार्य डी.सी. जनित्र द्वारा उत्पन्न किया गया वि.वा.ब. लोड को प्रदान करना है।
17. स्लिप-रिंग Slip Ring
स्लिप-रिंग प्रायः दो धात्विक (ताँबे या पीतल) के छल्ले होते हैं, जो आर्मेचर शाफ्ट पर अचालक पदार्थ की सहायता से स्थापित कर दिए जाते हैं। प्रत्येक स्लिप-रिंग एक कार्बन ब्रश के सम्पर्क में रहती है।

