Types of Electric Materials

NCVT Online Electrical Conductor and Insulator

Conductors & Insulators: बिजली की रीढ़

विद्युत (Electricity) के क्षेत्र में Electrical Materials का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। NCVT Online Trade Theory के अनुसार, इनमें से Conductors (चालक) और Insulators (कुचालक) बिजली की मूल संरचना को समझने के लिए सबसे आवश्यक हैं। इन्हें बिजली की रीढ़ (Backbone of Electricity) कहा जाता है।

Types of Electric Materials (वैद्युतिक पदार्थों के प्रकार)

वैद्युतिक पदार्थों को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है—

  1. चालक (Conductors)
  2. अचालक (Insulators)
  3. अर्धचालक (Semiconductors)

1. चालक (Conductor)

जिन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की बहुलता होती है, वे चालक कहलाते हैं।
अधिकांश धातुएँ—जैसे चाँदी, ताँबा, सोना, एल्युमीनियम आदि—चालक के प्रमुख उदाहरण हैं।

अच्छे चालक के गुण (Properties of a Good Conductor)

एक अच्छे चालक में निम्न गुण होने चाहिए—

  1. सस्ता और सरलता से उपलब्ध हो, ताकि विभिन्न वैद्युतिक कार्यों में आसानी से उपयोग किया जा सके।

  2. तन्य (Ductile) हो, ताकि उससे महीन तार बनाए जा सकें और उनकी वाइंडिंग इत्यादि कार्यों में उपयोग किया जा सके।

  3. सुदृढ़ (Tough/Strong) हो, ताकि ओवरहेड लाइनों के लिए उपयोग किए जाने वाले तार आसानी से न टूटें।

  4. आघातवर्ध्य (Malleable) हो, जिससे आवश्यकतानुसार चादरें और पत्तियाँ बनाई जा सकें।

  5. सोल्डरिंग योग्य हो, अर्थात उसके जोड़ों की सोल्डरिंग आसानी से की जा सके।

  6. कम विशिष्ट प्रतिरोध (Low resistivity) और अधिक चालकता (High conductivity) हो, जिससे वोल्टेज गिरावट व शक्ति हानि कम हो।

  7. पर्यावरणीय प्रभावों (नमी, वर्षा, धूप आदि) से अप्रभावित रहे।

चालकों का वर्गीकरण (Classification of Conductors)

चालकों को मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जाता है—

1. ठोसीय चालक (Solid Conductors)

ये चालक निश्चित आकार एवं आकृति वाले ठोस पदार्थ होते हैं।
उदाहरण—सोना, ताँबा (कॉपर), चाँदी, लोहा आदि।

2. द्रवीय चालक (Liquid Conductors)

वे चालक जो आकार में स्थिर नहीं होते तथा जिनमें प्रवाह (flow) होने का गुण होता है, द्रवीय चालक कहलाते हैं।
उदाहरण—जल (H₂O), सिल्वर नाइट्रेट (AgNO₃) आदि।

3. गैसीय चालक (Gaseous Conductors)

सामान्य स्थिति में कोई भी गैस आदर्श चालक नहीं होती
किसी गैस को चालक बनाने के लिए उसमें थोड़ी मात्रा में लवण/अपद्रव्य मिलाया जाता है, जिससे गैस आयनीकृत होकर चालक की भाँति व्यवहार करती है।
कुछ गैसें—जैसे हीलियम (He), आर्गन (Ar), नियॉन (Ne)—उच्च वोल्टेज पर गैसीय चालक के रूप में कार्य कर सकती हैं।

प्रमुख चालक पदार्थ (Main Conducting Materials)

1. चाँदी (Silver)

  • सफेद, अत्यधिक तन्य और आघातवर्ध्य धातु
  • अत्यधिक उच्च चालकता (लगभग 98%)
  • कम विशिष्ट प्रतिरोध: 1.64 माइक्रो ओम–सेमी (20°C पर)
  • बहुत महँगी होने के कारण इसका उपयोग मुख्यतः—
    ✔ रिले
    ✔ कॉन्टैक्टर
    ✔ स्टार्टर
    ✔ संपर्क बिन्दु (Contact Points)
    में किया जाता है।

2. ताँबा (Copper)

  • मटमैला–लाल, तन्य, आघातवर्ध्य, कम विशिष्ट प्रतिरोध वाली धातु
  • चालकता: लगभग 90%
  • विशिष्ट प्रतिरोध: 1.7 माइक्रो ओम–सेमी
  • पर्यावरणीय प्रभावों को आसानी से सहन करता है
  • प्रमुख उपयोग—
    ✔ विद्युत तार एवं केबल
    ✔ अर्थिंग
    ✔ इलेक्ट्रोड
    ✔ बस–बार (Busbar)
    ✔ विद्युत उपकरणों के निर्माण में

3. एल्युमीनियम (Aluminium)

  • सफेद, तन्य, आघातवर्ध्य, हल्की, जंगरोधी
  • चालकता: लगभग 60%
  • सस्ता तथा भारत में अत्यधिक मात्रा में उपलब्ध
  • कम विशिष्ट प्रतिरोध
  • ताँबे की तुलना में हल्का लेकिन कम सुदृढ़

     

  • उपयोग—
    ✔ ओवरहेड लाइन्स
    ✔ एल्युमीनियम कंडक्टर (AAC, ACSR आदि)
    ✔ पावर डिस्ट्रीब्यूशन में तार

     

4. सोना (Gold)

  • विद्युत का सबसे उत्तम चालक
  • पीला, तन्य, आघातवर्ध्य एवं अत्यधिक मूल्यवान
  • चालकता: लगभग 99%
  • अत्यधिक महँगा होने के कारण इसका उपयोग वैद्युतिक कार्यों में बहुत कम होता है।

     

  • कभी-कभी उच्च गुणवत्ता वाले कॉन्टैक्ट्स, कनेक्टर्स व माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग।

     

5. टंगस्टन (Tungsten)

  • गहरे सलेटी रंग की, अत्यधिक उच्च गलनांक वाली कठोर धातु
  • तन्य एवं अत्यधिक ताप सहनशील
  • विद्युत बल्ब व फ्लोरोसेंट ट्यूब के फिलामेंट बनाने में प्रयोग
  • इसका गलनांक लगभग 3400°C होता है।

6. जस्ता (Zinc)

  • नीले–सलेटी रंग की, नर्म और जंगरोधी धातु

  • उपयोग—
    ✔ लोहे के तारों, चादरों व पाइपों पर जंगरोधी परत चढ़ाने (गैल्वेनाइजिंग) में
    ✔ शुष्क सैलों के आवरण बनाने में

7. पीतल (Brass)

  • ताँबा + जस्ता की मिश्रधातु

  • पीला, तन्य, आघातवर्ध्य, जंगरोधी एवं मजबूत

  • चालकता: लगभग 48% (चाँदी की तुलना में)

  • उपयोग—
    ✔ विद्युत उपकरणों के संयोजक (connectors)
    ✔ पेंच, नट–बोल्ट
    ✔ उपकरणों के खोल (casings)

  • मिश्रण अनुपात बदलने पर विभिन्न प्रकार का पीतल बनाया जाता है।

8. निकिल (Nickel)

  • सफेद, जंगरोधी धातु

  • उपयोग—
    ✔ निकिल–आयरन संचायक सैलों की प्लेटें
    ✔ धातुओं पर जंगरोधी परत (Nickel plating)

9. लोहा (Iron)

  • सुदृढ़, सस्ता, सरलता से उपलब्ध, तन्य और आघातवर्ध्य

  • इसका विशिष्ट प्रतिरोध, ताँबे से लगभग 8 गुना अधिक

  • उपयोग—
    ✔ टेलीफोन तार
    ✔ अर्थ तार
    ✔ विद्युत उपकरणों की बॉडी
    ✔ ट्रांसफॉर्मर लेमिनेशन

10. टिन (Tin)

  • सफेद, अत्यधिक नर्म और जंगरोधी धातु

  • विशिष्ट उपयोग—
    ✔ सीसे के साथ मिश्रधातु बनाकर फ्यूज तार व सोल्डर
    ✔ अन्य धातुओं के तार/प्लेट पर जंगरोधी परत चढ़ाना

  • कम गलनांक होने के कारण शीघ्र पिघल जाती है।

11. जर्मन सिल्वर (German Silver)

  • मिश्रण: 60% ताँबा + 15% निकिल + 25% जस्ता

  • पीतल की तुलना में अधिक सुदृढ़

  • वातावरण परिवर्तन से कम प्रभावित

  • उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों में पीतल के विकल्प के रूप में उपयोग

12. सीसा (Lead)

  • सलेटी रंग की नर्म और भारी धातु

  • जंगरोधी, गलनांक टिन से अधिक

  • उपयोग—
    ✔ भूमिगत केबल पर नमीरोधी व सुरक्षा आवरण
    ✔ सीसा संचायक सैलों की प्लेटें
    ✔ टिन के साथ मिश्रधातु बनाकर सोल्डर व फ्यूज तार

13. मैगनिन (Manganin)

  • मिश्रण: 84% ताँबा + 12% मैंगनीज + 4% निकिल
  • उच्च विशिष्ट प्रतिरोध
  • उपयोग—
    ✔ सटीक प्रतिरोधक (precision resistors) बनाने में

14. यूरेका (Eureka / Constantan)

  • मिश्रण: 60% ताँबा + 40% निकिल
  • तन्य, उच्च विशिष्ट प्रतिरोध वाली धातु
  • उपयोग—
    ✔ अधिक ऊष्मा न उत्पन्न करने वाले प्रतिरोधक
    ✔ हीट नियंत्रक (Regulators)
    ✔ परीक्षण यंत्रों में स्थायी प्रतिरोध

     

15. पारा (Mercury)

  • सामान्य तापक्रम पर द्रव अवस्था में रहने वाली धातु
  • उपयोग—
    ✔ थर्मामीटर
    ✔ मरकरी वेपर लैम्प (Mercury Vapor Lamp) — जहाँ पारे की वाष्प का उपयोग होता है

16. नाइक्रोम (Nichrome)

  • मिश्रधातु: 80% निकिल + 20% क्रोमियम
  • उच्च विशिष्ट प्रतिरोध वाली, तन्य, सुदृढ़ और उच्च गलनांक वाली धातु
  • उपयोग—
    ✔ विद्युत प्रेस
    ✔ हीटर
    ✔ केतली
    ✔ टोस्टर
    ✔ अन्य हीटिंग एलिमेंट

चालक पदार्थों की तुलना (Comparison of Conducting Materials)

नीचे दी गई तालिका में 20°C तापमान पर विभिन्न चालकों की प्रतिरोधकता, गलनांक व ताप-गुणांक की तुलनात्मक जानकारी दी गई है—

क्र.सं. चालक प्रतिरोधकता (Ω·m) गलनांक (°C) ताप-गुणांक (20°C)
1
चाँदी (Silver)
1.59 × 10⁻⁸
960
0.0038
2
ताँबा (Copper)
1.72 × 10⁻⁸
1085
0.00428
3.
सोना (Gold)
2.44 × 10⁻⁸
1064
0.0034
4
एल्युमीनियम (Aluminium)
2.82 × 10⁻⁸
660
0.004013
5
टंगस्टन (Tungsten)
5.60 × 10⁻⁶
3422
0.0051
6
जिंक (Zinc)
5.90 × 10⁻⁸
420
0.0037
7
निकिल (Nickel)
6.85 × 10⁻⁸
1455
0.00537
8
लोहा (Iron)
1.0 × 10⁻⁷
1538
0.0069
9
प्लेटिनम (Platinum)
1.06 × 10⁻⁷
1768
0.00367
10
टिन (Tin)
1.09 × 10⁻⁷
232
0.0051
11
सीसा (Lead)
2.2 × 10⁻⁷
327
0.0043
12
जर्मन सिल्वर (German Silver)
3.316 × 10⁻⁷
906
0.0027
13
मैंगनिन (Manganin)
4.55 × 10⁻⁷
960
0.00025
14
यूरेका (Eureka/Constantan)
5 × 10⁻⁷
1270
+0.00001 से –0.004
15
पारा (Mercury)
9.8 × 10⁻⁷
–38.83°C
0.0039
16
नाइक्रोम (Nichrome)
1.10 × 10⁻⁶
1400
0.0014

अचालक (Insulators)

वे पदार्थ जिनमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यंत कम (नगण्य) होती है, अचालक कहलाते हैं।
सामान्य परिस्थितियों—जैसे सामान्य वोल्टेज, तापमान आदि—में इनमें विद्युत धारा का प्रवाह नहीं होता।

अचालक पदार्थ सामान्यतः अधात्विक (non-metallic) होते हैं।
प्रत्येक अचालक की एक निश्चित वोल्टेज सहन क्षमता होती है, जिसे डाइ-इलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ (Dielectric Strength) कहा जाता है।
इसे किलोवोल्ट प्रति मिलीमीटर (kV/mm) में व्यक्त किया जाता है।

अच्छे अचालक के गुणधर्म (Properties of a Good Insulator)

एक अच्छे अचालक में निम्नलिखित गुण होने चाहिए—

  1. उच्च डाइ-इलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ
    • अचालक की वोल्टेज सहन क्षमता (dielectric strength) अधिक होनी चाहिए ताकि इसका उपयोग उच्च वोल्टेज पर चलने वाले उपकरणों में किया जा सके।

       

  2. उच्च विशिष्ट प्रतिरोध (High Specific Resistance)
    • अचालक का विशिष्ट प्रतिरोध 10¹⁰ ओम–सेण्टीमीटर से अधिक होना चाहिए, ताकि विद्युत प्रवाह का रिसाव न हो।

       

  3. ऊष्मा विकिरण क्षमता (Heat Radiation Ability)
    • अचालक पदार्थ में ऊष्मा को विकिरित करने की क्षमता होनी चाहिए ताकि तापमान बढ़ने पर इसकी इन्सुलेटिंग क्षमता कम न हो।

       

  4. सुलभ एवं किफायती (Cheap & Easily Available)
    • अचालक सस्ता और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए ताकि सामान्य वैद्युतिक कार्यों में प्रयोग हो सके।

       

  5. सुदृढ़ एवं मजबूत (Mechanical Strength)
    • अचालक पर्याप्त मजबूत होना चाहिए ताकि उपयोग के दौरान टूट-फूट न हो।

       

  6. नमी से अप्रभावित (Moisture-Resistant)
    • अचालक नमी, जल या बरसात से प्रभावित न हो; अन्यथा उसकी अचालकता कम हो सकती है।

       

  7. विभिन्न आकारों में ढलने योग्य (Workability)
  • अचालक पदार्थ में इतना लचीलापन होना चाहिए कि उसे आवश्यक आकार में ढाला जा सके और विभिन्न वैद्युतिक यंत्रों में उपयोग किया जा सके।

प्रमुख अचालक पदार्थ (Main Insulating Materials)

वैद्युतिक कार्यों में उपयोग किए जाने वाले मुख्य अचालक पदार्थ निम्नलिखित हैं—

1. शुष्क हवा (Dry Air)

  • यह सबसे अच्छा प्राकृतिक अचालक पदार्थ है।

  • नमी (Humidity) इसकी अचालकता को कम कर देती है।

  • ओवरहेड लाइनों में नग्न (bare) धात्विक तारों के बीच हवा ही अचालक का कार्य करती है।

  • नमी के प्रभाव को कम करने के लिए चालक तारों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाती है।

2. वल्कैनाइज्ड रबर (Vulcanised Rubber)

  • साधारण रबर को गन्धक (Sulphur) और जिंक ऑक्साइड मिलाकर तथा ऊष्मीय प्रक्रिया से गर्म करके तैयार किया जाता है।

  • यह एक उत्तम, लचीला और मजबूत अचालक पदार्थ है।

  • उपयोग—
    ✔ तारों के इन्सुलेशन
    ✔ केबल्स के अचालक आवरण
    ✔ विद्युत उपकरणों में संरक्षण परत

3. पी.वी.सी. (Poly Vinyl Chloride – PVC)

  • यह एक अत्यंत लोकप्रिय, टिकाऊ और किफायती अचालक पदार्थ है।

     

  • वल्कैनाइज्ड रबर की तुलना में अधिक टिकाऊ और मौसम-प्रतिरोधी

     

  • आजकल अधिकांश तारों और केबलों के इन्सुलेशन में PVC का उपयोग किया जाता है।

     

  • उपयोग—
    ✔ घरेलू व औद्योगिक तार
    ✔ केबल इन्सुलेशन
    ✔ उपकरणों के बाहरी आवरण
  • यह एक कठोर रबर जैसा पदार्थ है जिसमें सल्फर की मात्रा 30% से 80% तक होती है।

  • लगभग 180°C पर यह जलने लगता है।

  • अम्लों से प्रतिक्रिया नहीं करता, इसलिए रासायनिक दृष्टि से स्थिर।

  • उपयोग—
    ✔ लेड–एसिड बैटरी के खोल
    ✔ पैनल बोर्ड
    ✔ विद्युत यंत्रों के केस/खोल
    ✔ ऊँचे वोल्टेज वाले उपकरणों में अचालक के रूप में

5.अभ्रक (Mica)

  • पारदर्शक, अग्नि-रोधी और नमी-रोधी अचालक पदार्थ

  • ऊष्मा एवं नमी से अप्रभावित रहने वाला एकमात्र प्राकृतिक खनिज

  • भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध

  • अत्यधिक ताप सहने की क्षमता

  • उपयोग—
    ✔ हीटिंग एलिमेंट के आधार (base)
    ✔ उच्च ताप वाले विद्युत उपकरणों में इन्सुलेशन

  • अभ्रक की ताप-सहन क्षमता और अचालकता के कारण इसके समान कोई अन्य प्राकृतिक पदार्थ उपलब्ध नहीं है।

6. माइकानाइट (Micanite)

  • अभ्रक की बहुत पतली चादरों को कपड़े/कागज पर वार्निश से चिपकाकर बनाया जाता है

  • साधारण अभ्रक मोड़े जाने पर टूट जाता है, परंतु माइकानाइट लचीला और मोड़ने योग्य होता है

  • उपयोग—
    ✔ मोटरों और जनरेटरों की आर्मेचर वाइंडिंग
    ✔ स्लॉट इन्सुलेशन
    ✔ कॉइल इन्सुलेशन

7. बैकेलाइट (Bakelite)

  • विभिन्न रेज़िन से निर्मित कठोर, भंगुर और ऊष्मा-संवेदनशील अचालक

     

  • किसी भी आकार में ढाला जा सकता है

     

  • उपयोग—
    ✔ स्विच
    ✔ प्लग टॉप
    ✔ सॉकेट
    ✔ बल्ब होल्डर
    ✔ सीलिंग रोज
    ✔ पैनल बोर्ड के अचालक भाग

8. लैदरॉयड पेपर (Leatheroid Paper)

  • विशेष प्रकार का ग्रे रंग का नमी-रोधी कागज

  • तेल, ग्रीस आदि से अप्रभावित

  • उपयोग—
    ✔ विद्युत मशीनों की वाइंडिंग में
    ✔ आर्मेचर स्लॉट्स में अचालक परत
    ✔ ट्रांसफॉर्मर व मोटर के अंदरूनी इंसुलेशन

9. रेज़िन (Resin)

  • एक कृत्रिम (synthetic) पदार्थ

  • मुख्यतः बैकेलाइट तथा अन्य अचालक खोल (insulating bodies) बनाने में उपयोग

10. खनिज तेल (Mineral Oil)

  • पेट्रोलियम से प्राप्त तेल जिसमें अच्छी अचालकता होती है

  • वनस्पति तेल समय के साथ ऑक्सीकृत होकर अपनी अचालकता खो देते हैं, इसलिए खनिज तेल पसंद किया जाता है

  • उपयोग—
    ✔ ट्रांसफॉर्मर
    ✔ स्टार्टर
    ✔ उच्च धारा वहन करने वाले स्विच
    ✔ कैपेसिटर
    ✔ इंसुलेटिंग और कूलिंग माध्यम के रूप में

11. पोर्सिलेन (Porcelain)

  • विशेष प्रकार की मिट्टी से बनाया गया पदार्थ

  • ढालने, सुखाने व पकाने की प्रक्रिया से तैयार

  • अत्यधिक सुदृढ़, अग्नि-रोधी और नमी-सहिष्णु

  • उपयोग—
    ✔ ओवरहेड लाइन इंसुलेटर
    ✔ किट-कैट फ्यूज
    ✔ स्विच
    ✔ हीटिंग एलिमेंट की प्लेटें

12. काँच (Glass)

  • नमी और जल से अप्रभावित

  • अत्यधिक अच्छा अचालक, परंतु भंगुर (brittle) होने से स्विचों में प्रयोग कम

  • उपयोग—
    ✔ इलेक्ट्रिक बल्ब
    ✔ फ्लोरोसेन्ट ट्यूब के खोल
    ✔ उच्च गुणवत्ता वाला इन्सुलेशन (क्राउन ग्लास की अचालकता अधिक होती है)

13. एस्बेस्टस (Asbestos)

  • सफेद रेशेदार प्राकृतिक खनिज

  • अग्नि से अप्रभावित, परंतु नमी सोख लेता है

  • उपयोग—
    ✔ विद्युत प्रेस
    ✔ हीटर
    ✔ ऊष्मा अवरोधक (heat barrier)
    ✔ उच्च ताप वाले विद्युत उपकरणों में इन्सुलेशन

14. मार्बल (Marble)

  • सफेद रंग का खनिज पत्थर, अज्वलनशील और ताप-सहिष्णु

  • उपयोग—
    ✔ इमर्शन हीटर के अचालक पदार्थ के रूप में
    ✔ उच्च तापमान संभावित स्थानों में इन्सुलेशन
    ✔ रेज़िन/कांच के साथ मिश्रित रूप में भी प्रयुक्त

15. शैलेक (Shellac)

  • यह एक रासायनिक पदार्थ है।

  • मेथिलेटेड स्पिरिट में घोलकर वार्निश तैयार किया जाता है।

  • उपयोग—
    ✔ कागज, कपड़ा, लकड़ी आदि को नमीरोधी बनाने में
    ✔ विद्युत वाइंडिंग में संरक्षण परत के रूप में

16. कागज (Paper)

  • घास, रूई आदि से तैयार किया जाने वाला अचालक पदार्थ
  • उपयोग—
    ✔ पेपर कंडेंसर (Paper capacitor) में अचालक परत
    ✔ ट्रांसफॉर्मर व मोटर के इन्सुलेशन में
  • इसके विशेष प्रकार—
    • लैदरॉयड पेपर
    • प्रैसफान पेपर

17. स्लेट (Slate)

  • काले रंग का खनिज पत्थर

  • तेल में डुबोकर तथा वार्निश चढ़ाकर उपयोग किया जाता है

  • उपयोग—
    ✔ स्विच बोर्ड
    ✔ पैनल बोर्ड

18. सूखी लकड़ी (Dry Wood)

  • यह एक अच्छा प्राकृतिक अचालक एवं ऊष्मा अवरोधक है

  • उपयोग—
    ✔ स्विच बोर्ड
    ✔ राउंड ब्लॉक
    ✔ बैटन (Batten)

  • बिल्कुल सूखी अवस्था में इसकी अचालकता अधिक रहती है

BIS-1271-1958/1985 के अनुसार अचालकों का वर्गीकरण

(BIS: Bureau of Indian Standards – Thermal Class of Insulating Materials)

अचालक पदार्थों को उनके अधिकतम सुरक्षित कार्य तापमान (Maximum Permissible Temperature) के आधार पर निम्न 7 वर्गों में विभाजित किया गया है—

अचालकों का वर्गीकरण (BIS-1271-1958/1985)

क्र.सं. वर्ग (Class) अधिकतम सुरक्षित तापमान प्रमुख अचालक पदार्थ
1
Y
90°C
सूत (Cotton), रेशम (Silk), साधारण कागज
2
A
105°C
सूत, रेशम, तेल में भीगा कागज
3.
E
120°C
लैदरॉयड पेपर, ऐम्पायर-क्लॉथ, फाइबर
4
B
130°C
अभ्रक (Mica), फाइबर-ग्लास, एस्बेस्टस
5
F
155°C
अभ्रक, फाइबर-ग्लास, एस्बेस्टस (विशेष बाइंडर के साथ)
6
H
180°C
एलास्टोमर तथा अभ्रक, फाइबर-ग्लास, एस्बेस्टस के विशेष मिश्रण
7
C
220°C – 250°C
अभ्रक, चीनी-मिट्टी (Porcelain), काँच, क्वार्ट्ज तथा इनसे बने पदार्थ

मुख्य बिंदु (Summary Points)

  • Class Y से C तक तापमान सहन क्षमता बढ़ती जाती है।
  • Class C सर्वोच्च श्रेणी है, जिसमें अचालक 250°C तक सुरक्षित रूप से कार्य करते हैं।
  • अभ्रक, फाइबर-ग्लास, और एस्बेस्टस जैसे पदार्थ कई वर्गों में आते हैं क्योंकि इन्हें अलग-अलग बाइंडर/रेजिन के साथ मिलाकर उनकी ताप सहन क्षमता बदली जा सकती है।

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