विद्युत का ज्ञान ITI Electrician के लिए न केवल पढ़ाई में बल्कि व्यावहारिक कार्य, परीक्षा और रोजगार के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। बिना विद्युत की सही समझ के एक कुशल इलेक्ट्रिशियन बनना संभव नहीं है।
इलेक्ट्रॉनों अथवा विद्युत आवेशों का एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवाह ही विद्युत (Electricity) कहलाता है। इलेक्ट्रॉनों का यह प्रवाह किसी भी पदार्थ में हो सकता है, किंतु उनके प्रवाह की गति पदार्थ के प्रकार पर निर्भर करती है।
विद्युत के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनों एवं विद्युतीय आवेशों की गति, उनके प्राकृतिक गुणों तथा व्यावहारिक अनुप्रयोगों का अध्ययन किया जाता है। यह भौतिक विज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है।
विद्युत एक ऐसा बल है जिसे नग्न आँखों या सूक्ष्मदर्शी से नहीं देखा जा सकता, बल्कि केवल इसके प्रभावों के माध्यम से अनुभव किया जा सकता है। विभिन्न प्रयोगों एवं दैनिक जीवन की घटनाओं में विद्युत का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
विद्युत के प्रकार (Types of Electricity)
विद्युत को मुख्यतः दो प्रकार में वर्गीकृत किया जाता है—
स्थिर विद्युत (Static Electricity)
गतिशील विद्युत (Dynamic / Current Electricity)
1. स्थिर विद्युत (Static Electricity)
जब विद्युत आवेश (Electric Charge) किसी वस्तु की सतह पर एकत्रित होकर स्थिर रहता है और प्रवाहित नहीं होता, उसे स्थिर विद्युत कहते हैं।
उदाहरण:
कंघी को सूखे बालों में रगड़ने पर कागज़ के छोटे टुकड़ों का चिपकना
बादलों में आवेश का जमाव (जिससे बाद में बिजली/आकाशीय विद्युत होती है)
मुख्य विशेषताएँ:
आवेश प्रवाहित नहीं होता
अल्प समय के लिए होती है
सामान्यतः इंसुलेटर की सतह पर पाई जाती है
2. गतिशील विद्युत (Current Electricity)
जब विद्युत आवेश किसी चालक (Conductor) में एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवाहित होता है, तो उसे गतिशील विद्युत कहते हैं।
उदाहरण:
बैटरी से बल्ब का जलना
पंखा, मोटर, हीटर का चलना
मुख्य विशेषताएँ:
आवेश निरंतर प्रवाहित होता है
यह परिपथ (Circuit) में कार्य करती है
घरेलू और औद्योगिक उपयोग इसी प्रकार का होता है
गतिशील विद्युत को उत्पन्न करने के स्रोत
गतिशील विद्युत निम्नलिखित स्रोतों एवं विधियों द्वारा उत्पन्न की जा सकती है—
इस विधि में फोटो-इलेक्ट्रिक सैल एवं सोलर सैल का उपयोग किया जाता है।
जब ये यंत्र सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आते हैं, तो तुरंत कार्य करने लगते हैं। सैल की प्लेटों द्वारा सूर्य के प्रकाश से धन एवं ऋण आवेश एकत्र किए जाते हैं तथा इन्हें किसी चार्ज होने वाली सैल या बैटरी में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
उपयोग:
निम्न स्तर पर विद्युत उत्पादन
स्ट्रीट लाइट
सोलर लैंप, सोलर चार्जर
2. तापीय विधि (Thermal Method)
इस विधि में दो भिन्न धातुओं के संगम बिंदु (Junction) को गर्म किया जाता है, जिससे उनके सिरों पर विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न हो जाता है और विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
इस विधि को थर्मोकपल विधि भी कहा जाता है।
विशेषता:
उत्पन्न धारा की मात्रा बहुत कम होती है
उपयोग:
व्यावसायिक स्तर पर उपयोग नहीं
ताप मापन उपकरणों में सीमित उपयोग
3. चुम्बकीय विधि (Magnetic Method)
यदि किसी स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र में किसी चालक को घुमाया जाए, तो उस चालक में विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न हो जाता है, जिसके कारण विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
यह विधि विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) पर आधारित है।
उपयोग:
ए.सी. एवं डी.सी. जनरेटर
व्यावसायिक एवं औद्योगिक स्तर पर विद्युत उत्पादन
4. रासायनिक क्रिया द्वारा (Chemical Method)
इस विधि में इलेक्ट्रोलाइट (रासायनिक विलयन) को रासायनिक क्रिया द्वारा उसके आयनों में विभक्त किया जाता है, जिसे आयनीकरण (Ionization) कहते हैं।
आयनीकरण से उत्पन्न स्वतंत्र आयनों के प्रवाह से विद्युत धारा उत्पन्न होती है, जिसे सेल या बैटरी में संचित किया जाता है।
विशेषता:
अधिक मात्रा में धारा उत्पन्न नहीं होती
उपयोग:
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
प्रयोगशालाएँ
ऑटोमोबाइल बैटरी
इन्वर्टर एवं UPS
संक्षेप में
व्यापारिक विद्युत उत्पादन: चुम्बकीय विधि
नवीकरणीय स्रोत: सोलर सैल
बैटरी आधारित स्रोत: रासायनिक विधि
विद्युत धारा के प्रभाव (Electricity Effects)
जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके कारण विभिन्न प्रकार के प्रभाव उत्पन्न होते हैं। इन्हें विद्युत धारा के प्रभाव कहते हैं। प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं—
1.ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect)
विद्युत धारा के प्रवाह से चालक गर्म हो जाता है। उदाहरण: इलेक्ट्रिक हीटर, इस्त्री, गीजर, बल्ब का फिलामेंट।
2. चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect)
धारा प्रवाहित होने पर चालक के आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। उदाहरण: इलेक्ट्रिक मोटर, रिले, इलेक्ट्रोमैग्नेट।
3. रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect)
विद्युत धारा के कारण रासायनिक अभिक्रिया होती है। उदाहरण: इलेक्ट्रोप्लेटिंग, बैटरी चार्जिंग।
4. प्रकाशीय प्रभाव (Light Effect)
कुछ उपकरणों में विद्युत धारा से प्रकाश उत्पन्न होता है। उदाहरण: बल्ब, ट्यूबलाइट, LED।
ITI Electrician में विद्युत का महत्व - NCVT Online Exam
ITI Electrician ट्रेड में विद्युत (Electricity) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह पूरे ट्रेड की आधारशिला है, क्योंकि इलेक्ट्रिशियन से संबंधित लगभग सभी कार्य विद्युत ज्ञान पर ही आधारित होते हैं। NCVT Online Exam मे इस Topic से अधिकतर प्रश्न पूछे जाते है
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FAQs
विद्युत क्या है?
विद्युत इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से उत्पन्न ऊर्जा है, जिसका उपयोग प्रकाश, ऊष्मा, गति और विभिन्न विद्युत उपकरणों को चलाने के लिए किया जाता है।
विद्युत के कितने प्रकार होते हैं?
विद्युत मुख्यतः दो प्रकार की होती है:
स्थिर विद्युत (Static Electricity)
गतिशील विद्युत (Dynamic / Current Electricity)
गतिशील विद्युत क्या है?
जब विद्युत आवेश किसी चालक में निरंतर प्रवाहित होता है, तो उसे गतिशील विद्युत कहते हैं। इसे विद्युत धारा (Electric Current) भी कहा जाता है।
गतिशील विद्युत को उत्पन्न करने के प्रमुख स्रोत कौन-से हैं?
गतिशील विद्युत को उत्पन्न करने के प्रमुख स्रोत हैं:
सेल (Cell)
बैटरी (Battery)
जनरेटर (Generator)
डायनेमो (Dynamo)
सोलर सेल (Solar Cell)
पावर स्टेशन (जल, ताप, पवन, नाभिकीय)
जनरेटर गतिशील विद्युत कैसे उत्पन्न करता है?
जनरेटर विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है।
सोलर सेल से किस प्रकार की विद्युत प्राप्त होती है?
सोलर सेल सूर्य के प्रकाश से DC (Direct Current) गतिशील विद्युत उत्पन्न करता है।